मेरे एक दोस्त है जिनका प्रॉपर्टी (Property) खरीदने का अनुभव बहुत खराब रहा है। पिछले 10 साल से वह दो अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स (Under-Construction Projects) में पैसे डाल रहे थे। दोनों ही प्रोजेक्ट्स के बिल्डर की आर्थिक हालत खराब है। घर कब मिलेगा, इस बारे में तस्वीर साफ नहीं है। यह समस्या सिर्फ मेरे दोस्त की नहीं है। हजारों लोग मेहनत की गाढ़ी कमाई के पैसे चुकाने के बाद भी अपने घर के लिए तरस रहे हैं।
इस समस्या ने घर खरीदने का प्लान बना रहे नए लोगों की दुविधा बढ़ा दी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन्हें रेडी-टू-मूव (बनकर तैयार) घर खरीदना चाहिए या अंडर-कंस्ट्रक्शन अपार्टमेंट खरीदना चाहिए। इस सवाल का हां या ना में जवाब देना मुश्किल है। दोनों के अपने फायदे और अपने नुकसान हैं। किसी व्यक्ति के लिए तैयार घर खरीदना सही हो सकता है तो किसी के लिए अंडर कंस्ट्रक्शन घर खरीदना फायदेमंद हो सकता है।
अगर आप भी इस उलझन में हैं तो हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं। इन्हें समझने के बाद आपके लिए फैसला लेना आसान हो जाएगा।
आम तौर पर रेडी-टू-मूव अपार्टमेंट का प्राइस अंडर-कंस्ट्रक्शन अपार्टमेंट के मुकाबले 10-30 फीसदी ज्यादा होता है। एक ही प्रोजेक्ट, एक ही लोकेशन और एक ही साइज के घर की कीमत में यह अंतर हो सकता है। इस अंतर की वजह से कई लोग अंडर-कंस्ट्रक्शन घर खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं।
आप रेडी-टू-मूव अपार्टमेंट 75 लाख रुपये में खरीद सकते हैं। अगर आप उतना ही बड़ा अंडर-कंस्ट्रक्शन घर खरीदते हैं तो उसकी कीमत कम होगी। लॉन्च के समय इसकी कीमत 50 लाख रुपये हो सकती है। 25 फीसदी बन जाने पर इसकी कीमत 60 लाख रुपये तक हो सकती है। 50 फीसदी तैयार हो जाने पर इसकी कीमत 68 लाख हो सकती है।
अगर आपके पास पैसे ज्यादा नहीं है और आप कुछ समय तक इंतजार कर सकते हैं तो आप अंडर-कंस्ट्रक्शन घर खरीद सकते हैं। आपको सिर्फ भरोसेमंद बिल्डर से ही घर खरीदना चाहिए।
तैयार घर खरीदने पर आपको डिलीवरी का इंतजार नहीं करना पड़ता है। आपको तुरंत घर का पजेशन मिल जाता है। अंडर-कंस्ट्रक्शन घर में कई बार इंतजार लंबा होता जाता है। हालांकि, 2016 में RERA के लागू होने के बाद घरों की डिलीवरी में होने वाली देर में कमी आई है। लेकिन, अब भी हालात पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। अगर आप दिमागी शांति चाहते हैं और डिलीवरी में देरी का रिस्क नहीं लेना चाहते तो आपको रेडी अपार्टमेंट खरीदना चाहिए।
तैयार घर खरीदने में आपको इंटीरियर, कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, लोकेशन, आसपास का इलाका सहित सब कुछ देखने को मिलता है। इसलिए आपको चौंकाने वाली किसी बात का सामना नहीं करना पड़ता है।
अगर आप रेंट पर रहते हैं और घर खरीदने के लिए होम लोन लेते हैं तो आपको एक साथ दो तरह का खर्च करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में रेडी-टू-मूव घर खरीदने में आपको जल्द रेंट चुकाने से छुटकारा मिल जाता है। फिर, रेंट की जगह आप EMI देना शुरू कर देते हैं। लेकिन, अगर आप अंडर-कंस्ट्रक्शन अपार्टमेंट खरीदते हैं तो आपको रेंट भी चुकाना पड़ता है और EMI भी चुकानी पड़ती है। जैसे-जैसे घर का कंस्ट्रक्शन बढ़ता है, आपकी EMI बढ़ती जाती है।
जहां तक टैक्स बेनेफिट की बात है तो यह जान लेना जरूरी है कि घर का पजेशन मिलने के बाद ही होम लोन पर डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत आप होम लोन के प्रिंसिपल पर सालाना 1.5 लाख रुपये डिडक्शन का दावा कर सकते हैं।
इंटरेस्ट पेमेंट पर आप सालाना 2 लाख रुपये के डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। यह दावा आप सेक्शन 24 बी के तहत करते हैं। लेकिन, ये दोनों डिडक्शन तभी मिलते हैं जब आपको घर की डिलीवरी हो जाती है।