EPF New Rules: बदल गए पीएफ के नियम! ₹1 लाख का एक्स्ट्रा फायदा, विड्रॉल लिमिट और क्लेम पर बड़ा अपडेट; 10 पॉइंट्स में समझें

EPF Scheme 2026 New Rules: EPFO ने नौकरीपेशा लोगों को बड़ी सौगात देते हुए दशकों पुराने नियमों की जगह नई 'EPF स्कीम 2026' और नए 'EPS नियम' लागू कर दिए हैं, जिससे PF और पेंशन से जुड़े 10 बड़े बदलाव सामने आए हैं। नए नियमों के तहत आंशिक पीएफ निकासी के लिए 12 महीने की सदस्यता अनिवार्य कर दी गई है और खाते में 25% 'मिनिमम बैलेंस' बरकरार रखना जरूरी होगा, यानी अब आप पूरा पैसा नहीं निकाल पाएंगे

अपडेटेड Jul 15, 2026 पर 1:38 PM
अब आप आंशिक निकासी के तहत अपने पीएफ खाते का पूरा पैसा नहीं निकाल पाएंगे

EPFO New EPF Scheme 2026 Rules & Changes: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने दशकों पुराने 'EPF स्कीम 1952' को नए 'EPF स्कीम 2026' से रिप्लेस कर दिया है। इस नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य पीएफ नियमों को आसान बनाना, सेवाओं का पूरी तरह डिजिटलीकरण करना और क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।

हालांकि इस नई स्कीम में योगदान की बुनियादी संरचना और रिटायरमेंट के लाभ पहले जैसे ही रखे गए हैं, लेकिन देश के 34 करोड़ से अधिक ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स के लिए कई बड़े नियमों में बदलाव कर दिया गया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नए नियमों के तहत आपके पीएफ खाते पर क्या असर पड़ेगा।

EPF Scheme 2026: पीएफ से जुड़े 10 बड़े बदलाव


1. क्या पीएफ योगदान में कोई बदलाव हुआ है?

नहीं, ईपीएफ योगदान की संरचना बिल्कुल पहले जैसी ही रहेगी। कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% योगदान देना जारी रखेंगे और एंप्लॉयर भी उसमें बराबर का योगदान देगा। ₹15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ योगदान अनिवार्य रहेगा, जबकि इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारी स्वेच्छा से अधिक योगदान जारी रख सकते हैं।

2. वेज सीलिंग का नया नियम

नई स्कीम में अब सीधे तौर पर ₹15,000 की सैलरी लिमिट का जिक्र हटा दिया गया है। इसके बजाय, यह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली 'वेज सीलिंग' को संदर्भित करेगा। इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में सरकार पीएफ के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाना चाहती है, तो उसे पूरी स्कीम में संशोधन करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वह एक साधारण नोटिफिकेशन के जरिए ऐसा कर सकेगी।

3. पीएफ विड्रॉल की श्रेणियां आसान हुईं

पहले पीएफ निकालने के लिए अलग-अलग उद्देश्यों के हिसाब से कई तरह के नियम और प्रावधान थे। नए नियमों में इन्हें समेटकर केवल तीन व्यापक श्रेणियों में बांट दिया गया है:

  • आवश्यक व्यक्तिगत जरूरतें
  • घर/आवास संबंधी आवश्यकताएं
  • विशेष परिस्थितियां

4. क्या है नया 'मिनिमम बैलेंस' नियम?

यह इस नई स्कीम का सबसे बड़ा बदलाव है। अब आप आंशिक निकासी के तहत अपने पीएफ खाते का पूरा पैसा नहीं निकाल पाएंगे।

मिनिमम बैलेंस: आपके कुल पीएफ फंड (कर्मचारी + एंप्लॉयर शेयर + ब्याज) का 25% हिस्सा हमेशा आपके खाते में रहना अनिवार्य है। इसे किसी भी आंशिक निकासी के दौरान नहीं निकाला जा सकता।

एलिजिबल मेंबर बैलेंस: आपके कुल फंड का केवल 75% हिस्सा ही निकासी योग्य होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर पात्रता शर्तों के आधार पर निकाला जा सकेगा।

5. आप कितनी बार और कितना पैसा निकाल सकते हैं?

सदस्य अपनी पात्रता पूरी होने पर इस सीमा तक पैसा निकाल सकते हैं:

बीमारी, शिक्षा, शादी और घर खरीदने/बनाने के लिए: आप अपने 'एलिजिबल मेंबर बैलेंस' का 100% तक निकाल सकते हैं।

कितनी बार निकाल सकते हैं: शिक्षा के लिए पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 10 बार, शादी और घर संबंधी काम के लिए अधिकतम 5 बार, और विशेष परिस्थितियों में एक वित्तीय वर्ष में केवल 2 बार ही निकासी की अनुमति होगी।

6. आंशिक निकासी के लिए 12 महीने का नया नियम

पुराने नियमों में अलग-अलग कामों के लिए पीएफ निकासी की समय-सीमा अलग थी। लेकिन अब मेडिकल, शिक्षा, शादी या घर जैसी अधिकांश जरूरतों के लिए आंशिक निकासी करने से पहले सदस्य को कम से कम 12 महीने की ईपीएफ सदस्यता पूरी करनी होगी।

7. नौकरी छोड़ने के बाद पूरा पीएफ निकालने की अवधि बढ़ी

पहले नौकरी छोड़ने के 2 महीने बाद पूरा पीएफ निकाला जा सकता था। लेकिन अब इस वेटिंग पीरियड को बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। यानी नौकरी जाने के 1 साल बाद ही आप पूरा पीएफ फंड विड्रॉ कर सकेंगे, हालांकि इस दौरान आप नियमों के तहत आंशिक निकासी कर सकते हैं। इसके अलावा, पेंशन (EPS) निकासी के लिए प्रतीक्षा अवधि को भी 24 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है।

8. नया अश्योरेंस बेनिफिट: नॉमिनी को मिलेंगे ₹1 लाख तक एक्स्ट्रा

EDLI स्कीम 2026 के तहत ईपीएफओ ने मृत सदस्यों के परिवारों के लिए एक नया अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा कवच जोड़ा है। अगर किसी एक्टिव सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उसके संचित पीएफ फंड के अलावा उसके नॉमिनी को एक अश्योरेंस राशि दी जाएगी।

अगर मृत सदस्य का औसत पीएफ बैलेंस ₹50,000 से अधिक है, तो नॉमिनी को ₹50,000 + (₹50,000 से ऊपर की राशि का 40%) अतिरिक्त दिया जाएगा। यह अतिरिक्त भुगतान अधिकतम ₹1 लाख तक हो सकता है।

9. अब 100% ऑनलाइन नॉमिनेशन अनिवार्य

नई स्कीम में पुराने कागजी फॉर्म-2 की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब सदस्यों को ईपीएफओ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से ही अपना नॉमिनेशन दर्ज या अपडेट करना होगा। इससे नॉमिनी को क्लेम सेटलमेंट के वक्त होने वाली दिक्कतों और कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।

10. क्लेम सेटलमेंट में देरी पर कमिश्नर की सैलरी से कटेगा ब्याज!

नए नियमों के तहत ईपीएफओ क्लेम को निपटाने के लिए 20 दिनों की सख्त समय-सीमा तय की गई है। अगर विभाग बिना किसी ठोस कारण के 20 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा नहीं करता है, तो देरी वाली अवधि के लिए 12% सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज देना होगा। सबसे खास बात यह है कि इस ब्याज की रकम को संबंधित क्षेत्रीय पीएफ कमिश्नर की सैलरी से वसूल किया जा सकता है।

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