देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल फिर चर्चा में है कि घर खरीदना ज्यादा फायदेमंद है या किराए पर रहना। किराए के घर में रहने से शुरुआत में कम खर्च आता है और जरूरत के हिसाब से आसानी से जगह बदली जा सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय में अपना घर खरीदना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
घर खरीदना बेहतर है या किराए पर रहना? बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और महंगे होम लोन के बीच यह सवाल आज हर मध्यम वर्गीय परिवार के मन में है। बड़े शहरों में घरों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि किराया अभी भी कई जगहों पर EMI से काफी कम है। ऐसे में कई लोग किराए के घर को ज्यादा सस्ता और आसान मान रहे हैं।
लेकिन रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर खरीदने का फैसला सिर्फ महीने का किराया और EMI देखकर नहीं करना चाहिए। अपना घर सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर लाइफस्टाइल का भी हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि महंगे घरों के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोग अपना घर खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
फिलहाल भारत के ज्यादातर शहरों में किराए से मिलने वाला रिटर्न केवल 2% से 3.5% के बीच है, जबकि होम लोन की ब्याज दरें इससे काफी ज्यादा हैं। यही वजह है कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में किराया और EMI के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
हालांकि, रियल एस्टेट एक्सपर्ट का कहना है कि घर खरीदने का फैसला सिर्फ पैसों के हिसाब से नहीं देखना चाहिए। आशिश रहेजा के मुताबिक घर सिर्फ निवेश नहीं बल्कि सुरक्षा और बेहतर लाइफस्टाइल का भी हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि मुंबई में कई इलाकों में घर की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि खरीदना किराए की तुलना में काफी महंगा हो गया है, फिर भी लोग लंबे समय की सुरक्षा के लिए घर खरीदना पसंद कर रहे हैं।
वहीं निखिल मदन का मानना है कि खासकर लग्जरी और प्रीमियम घरों में निवेश करने वाले लोगों के लिए घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है। लोग अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि स्थिरता, सुरक्षा और भविष्य के लिए मजबूत संपत्ति खरीद रहे हैं। अपने घर में लोग अपनी पसंद के हिसाब से बदलाव कर सकते हैं, जबकि किराए के घर में कई सीमाएं होती हैं। बार-बार घर बदलने की परेशानी से बचने के लिए भी अब कई परिवार अपना घर खरीदने को बेहतर मान रहे हैं।