रोड एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को मिलेगा फ्री इलाज, 1.50 लाख तक नहीं देना होगा पैसा

भारत में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को अब इलाज के लिए अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 से एक नई योजना लागू की है। नई योजना का नाम Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 है

अपडेटेड May 08, 2025 पर 7:55 AM
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भारत में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को अब इलाज के लिए अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।

भारत में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को अब इलाज के लिए अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 से एक नई योजना लागू की है। नई योजना का नाम Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 है। इस योजना के तहत किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। वह भी दुर्घटना के 7 दिनों तक। इसके लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने से पहले कोई पैसे नहीं देने होंगे।

किसे मिलेगा फायदा?

अगर किसी की मोटर वाहन से जुड़े हादसे में चोट लगती है, तो वह किसी भी नामित (designated) अस्पताल में जाकर कैशलेस इलाज करवा सकता है। अगर मरीज को किसी गैर-नामित अस्पताल में ले जाया गया, तो वहां केवल शुरुआती इलाज (stabilisation) का खर्च ही योजना से कवर होगा।


कैसे मिलेगी सुविधा?

मरीज या कोई भी व्यक्ति हादसे की जानकारी 24 घंटे के अंदर पुलिस को देगा। अस्पताल में मरीज के पहुंचते ही इलाज शुरू कर दिया जाएगा। यदि अस्पताल में इलाज संभव न हो, तो वह मरीज को किसी और अस्पताल में रेफर करेगा और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी करेगा।

योजना कैसे काम करेगी?

सरकार ने इसके लिए एक नोडल एजेंसी नियुक्त की है। यह एजेंसी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के साथ मिलकर काम करेगी — अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन, मरीजों का इलाज ट्रैक करना और समय पर पेमेंट तय करना इसकी जिम्मेदारी होगी। राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर योजना का विस्तार किया जाएगा और धोखाधड़ी पर नजर रखी जाएगी।

इलाज पूरा होने के बाद, अस्पताल एक ऑनलाइन पोर्टल पर क्लेम डालेगा। राज्य एजेंसी उसे 10 दिन के भीतर जांच कर मंजूर करेगी और पेमेंट करेगी। अगर कहीं नियमों को लेकर भ्रम हो, तो मुख्य योजना के नियम ही मान्य होंगे।

क्यों जरूरी है ये योजना?

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 2024 में 1.8 लाख लोगों की जान सड़क हादसों में गई, जिनमें से 30,000 लोग हेलमेट न पहनने की वजह से मारे गए। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में मरने वालों में 66% लोग 18 से 34 साल की उम्र के होते हैं और करीब 10,000 बच्चे स्कूल-कॉलेज के पास की दुर्घटनाओं में मारे गए।

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