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Salary Hike के बावजूद इस साल टेक होम सैलरी में अधिक इजाफा नहीं होगा, जानें इसकी वजह

सैलरी में हाइक होने का यह मतलब नहीं है कि टेक होम सैलरी में बहुत अधिक इजाफा होगा, कम सैलरी हाइक होने पर यह पहले से भी कम हो सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 24, 2021 पर 6:24 PM
Salary Hike के बावजूद इस साल टेक होम सैलरी में अधिक इजाफा नहीं होगा, जानें इसकी वजह

दुनियाभर की कंपनियां नए वित्त वर्ष की शुरुआत होने पर अप्रैल में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी (salary hike) करती हैं। कोरोना वायरस महामारी के बाद तो सैलरी हाइक को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं, क्योंकि महामारी के कारण 2020 में अधिक कंपनियों ने मंदी का हवाला देकर इंक्रिमेंट (increment) देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इस साल सैलरी हाइक के मोर्चे पर कर्मचारियों को अच्छी खबर सुनने के मिल सकती है। कई सर्वे रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत की कंपनियां इस साल अपने कर्मचारियों को अच्छी सैलरी हाइक देगी।

लेकिन, सैलरी में हाइक होने का यह मतलब नहीं है कि आपके हाथ में आने वाला कैश यानी टेक होम सैलरी (Take Home Salary) में बहुत अधिक इजाफा होगा। क्योंकि केंद्र सरकार (Central government) के नए नियम से टेक होम सैलरी पर असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार अप्रैल, 2021 से नया लेबर कोड (New labour code) लागू करने जा रही है। इसमें कर्मचारियों को मिलने वाली सीटीसी (CTC) यानी कॉस्ट टू कंपनी नए सिरे से तय होनी है। इस वदज से सैलरी हाइक होने पर भी कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी (Inhand Salary) बढ़ना मुश्किल है।

सैलरी स्ट्रक्चर में ये बदलाव होंगे

नए लेबर कोड के मुताबिक, कंपनियों को अपने कर्मचारियें के CTC में बेसिक वेतन कम से कम 50% करना होगा। इसका असर यह होगा कि आपका पीएफ अंशदान (PF contribution) बढ़ जाएगा। यानी कंपनी आपको जो सैलरी हाइक देगी वह PF contribution में एडजस्ट हो सकता है। इस वजह से सैलरी हाइक के बाद भी कैश इन हैंड बढ़ोतरी नहीं होगी या अगर इसमें बढ़ोतरी होगी भी तो वो भी मामूली होगी। इसके अलावा ग्रैच्युटि और लीव इवकैशमेंट भी बढ़ जाएगी, जिससे सैलरी हाइक होने के बाद भी टेम होम सैलरी पर असर पड़ेगा। यहां तक कि जिन कर्मचारियों की सैलरी कापी कम बढ़ेगी, उनकी टेक होम सैलरी पहले से भी कम हो सकती है। 

इस पर निर्भर करेगी टेक होम सैलरी

बिजनेस एम्प्लॉयमेंट पर नजर रखने वाली संस्था एऑन (Aon) के सीईओ नितिन सेठी ने कहा कि नए लेबर कोड का प्रभाव मामूली भी हो सकता है, क्योंकि भारत में ज्यादातर बड़ी कंपनियां CTC का 35% से 40% बेसिक पे के तौर पर देती हैं। उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड के तहत वेतन की प्रस्तावित परिभाषा के चलते कंपनियों को ग्रैच्युटी, छुटृटी के बदले पैसा और प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) के लिए ऊंचा प्रावधान करने की जरूरत होगी। इससे टेक होम सैलरी कम हो जाएगी।

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