सैलरी में इंक्रीमेंट से खुश हैं? पहले जानिए कितना पैसा हाथ में आएगा, कितना टैक्स में जाएगा

इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सैलरीड टैक्सपेयर्स को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इसके बावजूद जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, टैक्स लायबिलिटी बढ़ती जाती है। इसलिए इंक्रीमेंट लेटर मिलने पर पहले टैक्स का कैलकुलेशन करना समझदारी है

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 12:00 PM
इनकम ज्यादा होने पर टैक्स का असर ज्यादा पड़ता है।

कई कंपनियों ने अपने एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ा दी है। कुछ कंपनियों के एंप्लॉयीज को इस महीने के आखिर में इंक्रीमेंट लेटर मिल जाएगा। इंक्रीमेंट से पहले एंप्लॉयीज उत्साहित रहते हैं। लेकिन, इस उत्साह पर तब पानी फिर जाता है जब वे देखते हैं कि इंक्रीमेंट का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाएगा। दरअसल, सैलरी में इंक्रीमेंट का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। इससे एंप्लॉयीज के हाथ में जो बढ़ा हुआ पैसा आता है, वह उम्मीद से कम होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स लायबिलिटी भी बढ़ती है

इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सैलरीड टैक्सपेयर्स को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इसके बावजूद जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, टैक्स लायबिलिटी बढ़ती जाती है। अलग-अलग सैलरी लेवल को देखने से यह पता चलता है कि अगर किसी एंप्लॉयी की सैलरी 10 फीसदी बढ़ती है तो कितना पैसा उसकी जेब में आता है और कितना टैक्स में जाता है।


पहले टैक्स का कैलकुलेशन करना समझदारी

इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए एक एंप्लॉयी की सालाना सैलरी 12 लाख रुपये है। 10 फीसदी इंक्रीमेंट के बाद सैलरी 1.2 लाख रुपये बढ़ जाती है। लेकिन, उसे मार्जिनल रिलीफ के बाद 46,800 रुपये ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। इससे उसकी सैलरी में असल इजाफा सिर्फ 73,200 रुपये का होगा। इसी तरह अगर किसी एंप्लॉयी की सैलरी 16 लाख रुपये है तो 10 फीसदी इंक्रीमेंट के बाद सैलरी 1.6 लाख रुपये बढ़ जाएगी। लेकिन, उसे अतिरिक्त 29,380 रुपये ज्यादा टैक्स चुकाना होगा। इससे सैलरी में असल वृद्धि करीब 1.31 लाख रुपये की होगी।

10 फीसदी सैलरी बढ़ने पर कितना बढ़ जाएगा आपका टैक्स

salary increase

इनकम ज्यादा होने पर टैक्स का असर अधिक

इनकम ज्यादा होने पर टैक्स का असर ज्यादा पड़ता है। 24 लाख सालाना सैलरी वाले व्यक्ति की सैलरी 10 फीसदी बढ़ने पर 2.4 लाख रुयये के इंक्रीमेंट में से उसे असल फायदा करीब 1.69 लाख रुपये का होता है। यह बात भी ध्यान में रखने वाली है कि सैलरी बढ़ने पर रिटायरमेंट से जुड़े डिडक्शंस जैसे पीएफ भी बढ़ जाता है। कई कंपनियां इंक्रीमेंट का कुछ पैसा ग्रैच्युटी में डाल देती हैं। हालांकि, यह लंबी अवधि में फायदेमंद होता है।

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नई रीजीम में टैक्स-सेविंग्स के सीमित विकल्प

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरी में इंक्रीमेंट का लेटर मिलने पर खुशियां मनाने से पहले एंप्लॉयी को यह कैलकुलेशन करना चाहिए कि इंक्रीमेंट का कितना हिस्सा उसकी जेब में आएगा और कितना टैक्स में जाएगा। अगर एंप्लॉयी इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करता है तो उसके लिए टैक्स-सेविंग्स के ज्यादा विकल्प नहीं हैं। इनकम टैक्स की नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शंस का फायदा नहीं मिलता है। लेकिन, टैक्स के रेट्स कम हैं। हालांकि, कॉर्पोरेट एनपीएस के इस्तेमाल से टैक्स-सेविंग्स की जा सकती है।

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