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अप्रेजल में सैलरी बढ़ी, फिर भी हाथ में पैसे कम क्यों? नए लेबर कोड ने बढ़ाई कर्मचारियों की टेंशन

अप्रेजल सीजन में ज्यादातर कर्मचारी अच्छी सैलरी हाइक का इंतजार करते हैं। लेकिन इस बार कई IT और कॉरपोरेट कर्मचारियों को इंक्रीमेंट लेटर देखकर खुशी से ज्यादा हैरानी हो रही है। जानिये कारण..

Edited By: Sheetalअपडेटेड May 25, 2026 पर 4:38 PM
अप्रेजल में सैलरी बढ़ी, फिर भी हाथ में पैसे कम क्यों? नए लेबर कोड ने बढ़ाई कर्मचारियों की टेंशन
अप्रेजल सीजन में ज्यादातर कर्मचारी अच्छी सैलरी हाइक का इंतजार करते हैं।

अप्रेजल सीजन में ज्यादातर कर्मचारी अच्छी सैलरी हाइक का इंतजार करते हैं। लेकिन इस बार कई IT और कॉरपोरेट कर्मचारियों को इंक्रीमेंट लेटर देखकर खुशी से ज्यादा हैरानी हो रही है। वजह यह है कि कंपनी ने कॉस्ट टू कंपनी (CTC) तो बढ़ा दिया, लेकिन हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी यानी टेक होम सैलरी पहले से कम हो गई। कई कर्मचारी मजाक में इसे इंक्रीमेंट नहीं, डिक्रीमेंटकह रहे हैं।

दरअसल, इसके पीछे बड़ा कारण नया लेबर कोड और कंपनियों का बदला हुआ सैलरी स्ट्रक्चर है। कंपनियां अब कर्मचारियों की सैलरी को नए वेज रूल्स के हिसाब से दोबारा डिजाइन कर रही हैं। इसका सीधा असर पीएफ ग्रेच्युटी और इन हैंड सैलरी पर पड़ रहा है।

आखिर क्या है नया लेबर कोड?

नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी, DA और अलाउंस मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी माना जा रहा है। यानी कंपनियां अब बेसिक सैलरी बढ़ाने की तरफ जा रही हैं। सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन बेसिक सैलरी बढ़ने का मतलब है कि पीएफ और ग्रेच्युटी जैसी कटौतियां भी बढ़ जाएंगी। इससे कुल CTC तो बड़ा दिखेगा, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली रकम घट सकती है।

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