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SEBI ने म्यूचु्अल फंडों के B-30 कमीशन स्ट्रक्चर पर लगाई रोक, जानिए इसका क्या मतलब है और क्या असर पड़ेगा

SEBI ने पाया है कि B-30 कमीशन स्ट्रक्चर की इजाजत छोटे शहरों में फाइनेंशियल इनक्लूजन बढ़ाने और MF डिस्ट्रिब्यूशन स्ट्रक्चर मजबूत बनाने के लिए दी गई थी। लेकिन, इसका दुरुपयोग हो रहा है। इसलिए इसे सही तरीके से लागू करने की व्यवस्था जब तक नहीं बन जाती, इसका इस्तेमाल बंद रहेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 03, 2023 पर 12:18 PM
SEBI ने म्यूचु्अल फंडों के B-30 कमीशन स्ट्रक्चर पर लगाई रोक, जानिए इसका क्या मतलब है और क्या असर पड़ेगा
म्यूचुअल फंड्स के डिस्ट्रिब्यूशन के मामले में B-30 का मतलब ऐसे शहरों से है, जो टॉप-30 शहरों की लिस्ट में नहीं आते हैं। टॉप-30 शहरों की लिस्ट में आने वाले शहरों को T-20 कहा जाता है।

SEBI ने म्यूचुअल फंडों को छोटे शहरों के लिए इंसेंटिव स्ट्रक्चर का इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि यह स्ट्रक्चर पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। इसके दुरुपयोग का खतरा है। सेबी ने म्यूचुअल फंड के जरिए फाइनेंशियल इनक्लूजन बढ़ाने और निवेशकों के हित में B-30 शहरों के इनवेस्टर्स के नए निवेश पर अतिरिक्त 30 बेसिस प्वॉइंट्स एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने की इजाजत दी थी। 2 लाख रुपये तक के निवेश पर यह अतिरिक्त एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने की इजाजत है। सेबी का मानना था कि इससे म्यूचुअल फंड हाउसेज को B-30 शहरों में अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

B-30 का मतलब क्या है?

म्यूचुअल फंड्स के डिस्ट्रिब्यूशन के मामले में B-30 का मतलब ऐसे शहरों से है, जो टॉप-30 शहरों की लिस्ट में नहीं आते हैं। टॉप-30 शहरों की लिस्ट में आने वाले शहरों को T-20 कहा जाता है। SEBI ने इस बारे में 24 फरवरी को एक लेटर जारी किया था। Association of Mutual Funds in India (AMFI) ने 2 मार्च को यह लेटर म्यूचुअल फंड हाउसेज को फॉरवर्ड किया है। इसमें कहा गया है कि रेगुलेटर ने B-30 लोकेशंस में नए निवेश पर अतिरिक्त 30 बीपीएस एक्सपेंस रेशियो चार्ज करने के तरीके में कई गड़बड़ियां पाई हैं।

सेबी ने क्यों लगाई रोक?

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