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1996 के बाद पहली बार म्यूचुअल फंड ट्रस्टीज की जिम्मेदारियों में बदलाव, जानिए क्या है सेबी का प्लान

SEBI म्यूचुअल फंड्स से जुड़े ट्रस्टीज, स्पॉन्सर्स और AMC के बीच हितों के टकराव को रोकना चाहता है। इससे यूनिटहोल्डर्स के हितों पर खराब असर पड़ता है। सेबी ने कुछ समय पहले इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। इसमें ट्रस्टीज की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 20, 2023 पर 3:33 PM
1996 के बाद पहली बार म्यूचुअल फंड ट्रस्टीज की जिम्मेदारियों में बदलाव, जानिए क्या है सेबी का प्लान
इंडियन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का स्ट्रक्चर तीन स्तरीय है। इसमें स्पॉन्सर, ट्रस्ट और AMC शामिल हैं।

SEBI ने कुछ समय पहले म्यूचुअल फंड (MF) की भूमिका और जिम्मेदारियों पर एक कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसका मकसद एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के ट्रस्टीज में यूनिटहोल्डर्स और स्टेकहोल्डर्स के बीच हितों के टकराव का समाधान करना है। इंडियन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का स्ट्रक्चर तीन स्तरीय है। इसमें स्पॉन्सर, ट्रस्ट और AMC शामिल हैं। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के पास म्यूचुअल फंड की प्रॉपर्टी होती है। यूनिटहोल्डर्स के हित को ध्यान मे रख ऐसा किया जाता है। म्यूचुअल फंड रेगुलेशन में हितों के टकराव से बचने के लिए गाइडलाइंस दी गई हैं। फिर भी, कुछ ऐसे एरियाजा हैं, जिन पर ट्रस्टीज के लिए ज्यादा ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

एमएफ स्कीम के स्पॉन्सर या एसोसिएट्स कंपनियों के पब्लिक इश्यू में निवेश करने, इनसाइडर ट्रेडिंग में लिप्त होने या एमएफ स्कीम तक पहुंच का लाभ उठाने के लिए फ्रंट रनिंग और वोटिंग के दौरान स्पॉन्सर के एमएफ स्कीमों के फैसले को प्रभावित करना हितों के टकराव के उदाहरण हैं। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर संदीप पारेख ने कहा, "AMC प्रॉफिट बनाने वाली एक Entity है। SEBI उनके लिए चेक एंड बैलेंसज चाहता है।"

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पारेख ने कहा, "रेगुलेटर हमेशा म्यूचुअल फंड्स को लेकर फिक्रमंद रहता है, क्योंकि ये सभी प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यदा रिटेल हैं। सभी एसेट क्लासेज में सबसे ज्यादा रेगुलेशंस म्यूचुअल फंड्स के मामले में रहे हैं।"

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