SEBI ने कुछ समय पहले म्यूचुअल फंड (MF) की भूमिका और जिम्मेदारियों पर एक कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसका मकसद एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के ट्रस्टीज में यूनिटहोल्डर्स और स्टेकहोल्डर्स के बीच हितों के टकराव का समाधान करना है। इंडियन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का स्ट्रक्चर तीन स्तरीय है। इसमें स्पॉन्सर, ट्रस्ट और AMC शामिल हैं। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के पास म्यूचुअल फंड की प्रॉपर्टी होती है। यूनिटहोल्डर्स के हित को ध्यान मे रख ऐसा किया जाता है। म्यूचुअल फंड रेगुलेशन में हितों के टकराव से बचने के लिए गाइडलाइंस दी गई हैं। फिर भी, कुछ ऐसे एरियाजा हैं, जिन पर ट्रस्टीज के लिए ज्यादा ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
