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Passive Mutual Funds: सेक्टोरल निवेश से मिलेगा सुरक्षित और विविध लाभ, जानिए पैसिव फंड्स के फायदे

Passive Mutual Funds: आज के तेज रफ्तार बाजार में निवेशक स्मार्ट तरीके तलाश रहे हैं, जहां कम जोखिम और ज्यादा फायदा मिले। ICICI प्रूडेंशियल जैसे फंड हाउस पैसिव म्यूचुअल फंड्स को सेक्टोरल निवेश के लिए बढ़ावा दे रहे हैं, जो नए और पुराने निवेशकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 06, 2026 पर 3:07 PM
Passive Mutual Funds: सेक्टोरल निवेश से मिलेगा सुरक्षित और विविध लाभ, जानिए पैसिव फंड्स के फायदे

ICICI Prudential Asset Management Company ने हाल ही में निवेशकों को यह समझाया है कि पैसिव म्यूचुअल फंड्स, खासकर सेक्टोरल ETFs और इंडेक्स फंड्स, किस तरह उन्हें बेहतर और सुरक्षित निवेश विकल्प प्रदान कर सकते हैं। कंपनी का मानना है कि इन फंड्स के जरिए निवेशक बिना किसी एकल स्टॉक रिस्क के, पूरे सेक्टर में एक्सपोजर ले सकते हैं और अपने पोर्टफोलियो को अधिक विविध बना सकते हैं।

पैसिव फंड्स वे होते हैं जो किसी इंडेक्स या सेक्टर को ट्रैक करते हैं। इनमें फंड मैनेजर स्टॉक्स चुनने की बजाय पूरे इंडेक्स को फॉलो करता है। इसका फायदा यह है कि निवेशक को कम खर्च पर इंडेक्स के प्रदर्शन के अनुसार रिटर्न मिलता है। ICICI Prudential AMC के Principal – Investment Strategy, चिंतन हरिया ने बताया कि सेक्टोरल ETFs निवेशकों को टैक्टिकल सेक्टर एक्सपोजर देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक को लगता है कि आने वाले समय में आईटी या बैंकिंग सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करेगा, तो वह उस सेक्टर के ETF में निवेश कर सकता है।

एक्टिव फंड्स की तुलना में पैसिव फंड्स का एक्सपेंस रेशियो बहुत कम होता है, जो लंबे समय में रिटर्न को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, अगर सालाना 1% कम खर्च बचे, तो 10 साल बाद ये बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। साथ ही, ये फंड्स पूरी तरह पारदर्शी हैं – आपको हर पल पता रहता है कि पैसा किन स्टॉक्स में लगा है, क्योंकि ये इंडेक्स के स्टॉक्स ही होते हैं। छोटे निवेशक इससे आकर्षित हो रहे हैं, जो बजट में स्मार्ट निवेश चाहते हैं।

इन फंड्स का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निवेशक को एकल स्टॉक रिस्क से बचाव मिलता है। ETF पूरे सेक्टर को कवर करता है, जिससे जोखिम कम होता है और विविधता बढ़ती है। साथ ही, पैसिव फंड्स का खर्च भी एक्टिव फंड्स की तुलना में कम होता है। निवेशक को खुद स्टॉक्स चुनने की जरूरत नहीं होती और वह आसानी से सेक्टर-आधारित निवेश कर सकता है।

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