भारत में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां जनवरी 2022 में भी बढ़ती नजर आई। हालांकि इस बढ़त की गति पिछले महीने की तुलना में बहुत सुस्त रही। जनवरी महीने में सर्विस सेक्टर का पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (PMI) 51.5 के 6 महीने के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया जो कि दिसंबर 2021 में 55.5 के स्तर पर रहा था। 3 फरवरी को जारी आंकड़ों के आधार पर हम यह जानकारी दे रहे हैं।
यह भी बतातें चलें की 50 से ऊपर की PMI का मतलब यह होता है कि कारोबारी गतिविधियों में विस्तार देखने को मिला है। वहीं PMI रीडिंग 50 से कम होती है तो इसका मतलब होता है कि कारोबारी गतिविधियों में संकुचन आया है।
PMI का संकलन करने वाली IHS Markit का कहना है कि सर्विस सेक्टर की ग्रोथ में आई इस सुस्ती की वजह कोरोना के नए वैरिएंट का फैलाव, इसके चलते लागू प्रतिबंध और बढ़ती महंगाई का दबाव रहा है।
1 फरवरी को जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2022 में मैन्यूफैक्चरिंग PMI दिसंबर के 55.5 से गिरकर 54 पर आ गई है। कोविड के मामलों में बढ़ोतरी ने अपना प्रतिकूल असर दिखाया है। इसी तरह जनवरी महीने में कम्पोजिट PMI भी दिसंबर के 56.4 से गिरकर 53 पर आ गई है।
IHS Markit के इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर Pollyanna De Lima ने कहा कि कोरोना के मामलों में बढ़त, इसके चलते लागू प्रतिबंधों ने सर्विस सेक्टर की ग्रोथ पर नेगेटिव असर डाला है। न्यू बिजनेस और आउटपुट दोनों में काफी सुस्त गति से बढ़त देखने को मिली है और यह ग्रोथ 6 महीनों के सबसे धीमे स्तर पर रही है।
IHS Markit के सर्वे के मुताबिक जनवरी 2022 में उत्पादन लागत की महंगाई दर 10 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं कंपनियां इसी दर पर अपने प्रोडक्ट की कीमतों में बढ़त नहीं कर पाईं। हालांकि उन्होंने दिसंबर 2021 की तुलना में कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी की है।