Silver Prices: चांदी की कीमतों में आज मंगलवार 17 फरवरी को तेज गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव करीब 73 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार आया और कीमत 75.50 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। फिर भी यह पिछले बंद भाव से लगभग 2.88 प्रतिशत नीचे रही।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को चांदी का वायदा भाव 2,40,201 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। यह पिछले बंद के मुकाबले 0.13 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है। फरवरी के पहले सप्ताह में चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसल गई थी। उस समय ग्लोबल संकेतों, मुनाफावसूली और बढ़ती अस्थिरता का दबाव दिखा था।
2025 में शानदार तेजी, फिर सुधार
चांदी ने 2025 में शानदार प्रदर्शन किया था। जनवरी 2026 तक यह नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में तेज करेक्शन आया और बाजार सुधार के दौर में चला गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई फिर से बन सकती है, लेकिन इसके लिए कई शर्तों का एक साथ पूरा होना जरूरी है।
रिकॉर्ड हाई की कितनी संभावना?
मार्केट एनालिस्ट्स रॉस मैक्सवेल के अनुसार, अगर वास्तविक ब्याज दरें घटती हैं, डॉलर कमजोर होता है और बड़े केंद्रीय बैंक मॉनिटरी ढील की ओर बढ़ते हैं, तो चांदी में फिर तेजी आ सकती है। हालांकि वे मानते हैं कि यह आसान नहीं होगा। उनके मुताबिक चांदी आमतौर पर सोने से थोड़ी देर से तेजी पकड़ती है और बाद के चरण में ज्यादा तेज दौड़ती है। फिलहाल इंडस्ट्रियल मांग स्थिर है। सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर से मांग बनी हुई है, लेकिन विस्फोटक नहीं है। साथ ही इन्वेंटरी और रिसाइक्लिंग सप्लाई भी कीमतों को सीमित कर सकती है।
किन वजहों से रुक सकती है तेजी?
अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो बिना ब्याज वाली धातुओं में निवेश कम हो सकता है। मजबूत शेयर बाजार भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश से दूर कर सकता है। इसके अलावा अगर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग धीमी पड़ती है तो इंडस्ट्रियल मांग घट सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के लिए चांदी में सीमित निवेश बनाए रखना ठीक है। लेकिन केवल बड़ी तेजी की उम्मीद में बहुत ज्यादा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। गिरावट के समय धीरे-धीरे खरीदारी करना बेहतर रणनीति मानी जा रही है। निवेश को बुलियन, कम लागत वाले फंड और मजबूत माइनिंग कंपनियों में बांटकर रखना भी फायदेमंद हो सकता है।
इतिहास बताता है कि चांदी में तेज उछाल के बाद अक्सर लंबा ठहराव आता है। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनानी चाहिए।
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