Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन भी चांदी की कीमतो में गिरावट देखने को मिली। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। उधर गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमत 2,40,000 रुपये प्रति किलो हो गई।
आज बाजार ओपन होने से पहले तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 1.24% घटकर यानी 2805 रुपये गिरावट के साथ 2,22,950 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,25,755 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियंस के मुताबिक चांदी की कीमत 2,23,280 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60.37 डॉलर प्रति औंस हो गई।
औद्योगिक मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव, ये सभी घरेलू स्तर पर चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। स्थानीय बाज़ार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं।
आइए 13 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में चांदी की ताजा कीमतों पर एक नज़र डालते हैं
डॉलर मजबूत होने की वजह से चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आ पा रही है। वहीं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर है, जिनसे यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों में क्या बदलाव कर सकता है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 18 महीने के ऊंचे स्तर पर है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित हो रही है। सोने और चांदी की कीमतों पर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। वहीं, ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय ऐसे विकल्पों में पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं, जिनसे ब्याज मिलता है।
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो दो सप्ताह के ऊंचे स्तर के करीब है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकता है।
आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व के बयान, डॉलर की चाल और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरें सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले सप्ताह फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची ब्याज दरों से सोने-चांदी पर दबाव पड़ा था। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत में प्रगति से जुड़ी टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार के माहौल में सुधार आया।
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