Silver Prices: क्या फिर बढ़ने वाले चांदी के दाम? सरकार ने आयात पर और कसी लगाम

Silver Prices: सरकार ने चांदी के आयात नियम और सख्त कर दिए हैं। अब कई श्रेणियों की चांदी आयात करने के लिए DGFT की मंजूरी जरूरी होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे घरेलू सप्लाई और चांदी की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 11:01 PM
भारत सबसे ज्यादा चांदी यूएई, ब्रिटेन और चीन से खरीदता है।

Silver Prices: सरकार ने चांदी के आयात को लेकर नियम और सख्त कर दिए हैं। अब कुछ तय रास्तों से चांदी मंगाने के लिए विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

अब बिना मंजूरी नहीं मंगा सकेंगे चांदी

मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब चांदी के आयात पर निगरानी बढ़ा दी गई है। RBI द्वारा नामित एजेंसियां, DGFT से मंजूर संस्थाएं और IIBX के जरिए चांदी आयात करने वाले योग्य जौहरी अब सीधे चांदी नहीं मंगा सकेंगे। इसके लिए DGFT से मंजूरी मिलने के बाद ही चांदी का आयात किया जा सकेगा।


यह नियम 99.9% या उससे ज्यादा शुद्धता वाली चांदी पर लागू होगा। इसमें सोने या प्लैटिनम की परत चढ़ी चांदी भी शामिल है। साथ ही कच्ची चांदी, अर्ध-तैयार चांदी, चांदी के पाउडर और ग्रेन्स पर भी यह नियम लागू रहेगा।

कुछ तरह की चांदी पर बढ़ी निगरानी

सरकार ने 99.9% शुद्धता वाली चांदी के ग्रेन्स, पाउडर और कुछ अन्य रूपों को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब इन्हें विदेश से मंगाने के लिए DGFT से मंजूरी लेनी होगी।

सरकार इससे पहले भी चांदी के आयात पर सख्ती कर चुकी है। पिछले महीने 99.9% शुद्धता वाली सिल्वर बार और दूसरी अर्ध-तैयार चांदी को भी प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया था। अब सरकार ने दायरा बढ़ाते हुए चांदी के कुछ और रूपों को भी इस श्रेणी में शामिल कर लिया है।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

सरकार पहले ही सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर चुकी है। सरकार की कोशिश कीमती धातुओं के आयात को काबू में रखने और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने की है।

पश्चिम एशिया में तनाव और महंगे कच्चे तेल की वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार गैर-जरूरी आयात को सीमित करना चाहती है।

सरकार के फैसले पर एक्सपर्ट की राय

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा, 'नए नियमों के बाद सरकार के पास यह तय करने का अधिकार होगा कि देश में कितनी चांदी आयात होगी और किन माध्यमों से आएगी। आमतौर पर ऐसे कदम तब उठाए जाते हैं, जब आयात तेजी से बढ़ रहा हो या चालू खाता घाटे पर दबाव हो। हालांकि सरकार ने इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।'

उन्होंने कहा, 'अगर आयात मंजूरी जारी करने में देरी होती है या आयात की मात्रा सीमित रखी जाती है, तो घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे स्थानीय बाजार में प्रीमियम बढ़ सकता है। घरेलू औरवैश्विक कीमतों के बीच का अंतर भी बढ़ सकता है। आने वाले महीनों में इसका असर बाजार की धारणा और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।'

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया आयात

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 12 अरब डॉलर की चांदी आयात की। एक साल पहले यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था।

अप्रैल 2026 में अकेले चांदी का आयात 157% बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर पहुंच गया। वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150% बढ़ा।

कहां से आती है चांदी?

भारत सबसे ज्यादा चांदी यूएई, ब्रिटेन और चीन से खरीदता है। देश में इसका इस्तेमाल सिर्फ गहने बनाने में नहीं, बल्कि सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई दूसरे उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

चांदी के आयात में तेज उछाल को देखते हुए सरकार अब इस पर ज्यादा नजर रखना चाहती है। इसी वजह से आयात के नियमों को और सख्त किया गया है।

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