SIP Calculator: बच्चे के जन्म के साथ ही माता-पिता के सामने एक लंबी लिस्ट आ जाती है। पढ़ाई, कॉलेज, करियर और आगे की जरूरतें। इनमें से ज्यादातर खर्च आज छोटे लगते हैं, लेकिन 15-18 साल बाद इनकी रकम काफी बड़ी हो सकती है। ऐसे में छोटी उम्र से निवेश शुरू करना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।
मान लीजिए बच्चे के जन्म के साथ ही उसके नाम से हर महीने 2,000 रुपये की SIP शुरू की गई। रकम बहुत बड़ी नहीं है। परिवार के मासिक बजट पर भी इसका बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। लेकिन 18 साल का समय इस छोटी रकम को अच्छी-खासी पूंजी में बदल सकता है।
10% रिटर्न मिला तो करीब 11.5 लाख रुपये
अगर इस SIP से लंबी अवधि में औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 18 साल बाद करीब 11.53 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है। यानी 4.32 लाख रुपये आपका लगाया हुआ पैसा होगा, जबकि करीब 7.21 लाख रुपये रिटर्न से बनेंगे। यहां समय सबसे बड़ा फैक्टर है। निवेश की अवधि 18 साल होने की वजह से रिटर्न पर भी आगे रिटर्न मिलता रहता है।
12% रिटर्न पर रकम 14 लाख के पार
अब अगर लंबी अवधि में औसत रिटर्न 12% सालाना रहा, तो तस्वीर और मजबूत हो जाती है। 2,000 रुपये की यही मंथली SIP 18 साल बाद करीब 14.23 लाख रुपये का फंड बना सकती है। इसमें भी कुल योगदान सिर्फ 4.32 लाख रुपये रहेगा। करीब 9.91 लाख रुपये की रकम निवेश से मिलने वाले रिटर्न से बनेगी।
15% रिटर्न मिला तो करीब 20 लाख रुपये
सबसे तेज तस्वीर तब बनती है जब निवेश पर औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसी स्थिति में 2,000 रुपये की SIP 18 साल बाद करीब 19.65 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यहां कुल निवेश वही 4.32 लाख रुपये है। लेकिन रिटर्न करीब 15.33 लाख रुपये हो जाता है। यही वह जगह है जहां कंपाउंडिंग का असर साफ दिखाई देता है। निवेश की रकम छोटी है, लेकिन समय लंबा होने के कारण रिटर्न को भी बढ़ने के लिए पर्याप्त वक्त मिलता है।
नोट: 10%, 12% और 15% सिर्फ संभावित रिटर्न हैं। असल रिटर्न बाजार के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।
सिर्फ 2,000 रुपये पर रुकना जरूरी नहीं
2,000 रुपये की SIP को शुरुआत मान सकते हैं। जैसे-जैसे परिवार की आय बढ़े, SIP की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। मान लीजिए कुछ साल बाद मासिक SIP 2,000 से बढ़ाकर 3,000 या 5,000 रुपये कर दी जाती है। तब 18 साल के अंत में बनने वाला फंड काफी बड़ा हो सकता है।
इसे स्टेप-अप SIP के जरिए भी प्लान किया जा सकता है, जिसमें आमदनी बढ़ने के साथ निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। इसका फायदा यह है कि शुरुआत में परिवार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। और बाद में बढ़ती आय के साथ बच्चे का फाइनेंशियल लक्ष्य भी बड़ा किया जा सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।