SIP Calculator: मार्केट क्रैश से SIP को कैसे होता है फायदा, समझिए पूरा कैलकुलेशन
SIP Calculator: शेयर बाजार में गिरावट आते ही कई निवेशक SIP रोक देते हैं, लेकिन क्या यही सबसे बड़ी गलती है? एक उदाहरण बताता है कि क्रैश के दौरान निवेश जारी रखने वाले निवेशक को तगड़ा रिटर्न मिला, जबकि SIP रोकने वाला काफी पीछे रह गया। जानिए पूरा कैलकुलेशन।
शेयर मार्केट क्रैश पर कुछ समय के लिए SIP पोर्टफोलियो में नुकसान या बहुत कम रिटर्न दिख सकता है।
SIP Calculator: जब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो बहुत से निवेशकों को SIP की चिंता होने लगती है। पोर्टफोलियो की वैल्यू घटती देखकर कई लोग घबरा जाते हैं और SIP रोकने या बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में गिरावट का दौर ही लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मौका साबित हो सकता है।
मार्केट क्रैश SIP को कैसे फायदा मिलता है?
अगर आप SIP के जरिए निवेश करते हैं, तो बाजार में गिरावट का असर एकमुश्त निवेश करने वालों से अलग होता है। गिरते बाजार में आपके पुराने निवेश की वैल्यू भले कम हो जाए, लेकिन हर नई SIP किस्त से आप कम कीमत पर ज्यादा यूनिट खरीद पाते हैं।
अगर आसान शब्दों में कहें तो बाजार में गिरावट के दौरान वही रकम आपको पहले की तुलना में ज्यादा हिस्सेदारी दिलाती है। बाद में जब बाजार संभलता है, तो यही अतिरिक्त यूनिट्स आपके रिटर्न को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
बाजार गिरते ही क्यों घबरा जाते हैं निवेशक?
बाजार में करेक्शन आने पर कुछ समय के लिए पोर्टफोलियो में नुकसान या बहुत कम रिटर्न दिख सकता है। ऐसे में कई निवेशक SIP रोक देते हैं या पूरी तरह बंद कर देते हैं।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में गिरावट निवेश का स्वाभाविक हिस्सा है। इसे खतरे की बजाय मौके के रूप में देखना चाहिए। क्योंकि इसी दौरान कम कीमत पर खरीदी गई यूनिट्स भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।
SIP निवेशकों के लिए XIRR क्यों अहम?
अधिकतर निवेशक अपने रिटर्न को मापने के लिए CAGR देखते हैं। लेकिन CAGR मुख्य रूप से एकमुश्त निवेश के लिए ज्यादा उपयोगी होता है।
SIP में हर महीने अलग-अलग तारीख पर निवेश होता है। इसलिए यहां XIRR ज्यादा सटीक तस्वीर देता है। XIRR हर निवेश की तारीख और रकम को ध्यान में रखकर वास्तविक वार्षिक रिटर्न निकालता है। इसी वजह से SIP निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का प्रदर्शन समझने के लिए XIRR पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
कैसे काम करता है रुपी कॉस्ट एवरेजिंग?
SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप बाजार की स्थिति चाहे जैसी हो, नियमित अंतराल पर एक तय रकम निवेश करते रहते हैं। जब बाजार गिरता है तो म्यूचुअल फंड की NAV भी कम हो जाती है। ऐसे में उसी रकम से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
इससे निवेश की औसत लागत कम होती जाती है। इसे ही Rupee Cost Averaging कहा जाता है। बाद में जब बाजार में रिकवरी आती है, तो कम कीमत पर खरीदी गई यूनिट्स ज्यादा फायदा देती हैं और कुल रिटर्न को बेहतर बनाती हैं।
एक उदाहरण से समझिए
अब मान लीजिए दो निवेशक हर महीने 10,000 रुपये की SIP शुरू करते हैं। दोनों बाजार में गिरावट से पहले निवेश कर रहे थे।
पहला निवेशक गिरावट के दौरान भी SIP जारी रखता है। दूसरा निवेशक बाजार गिरने पर SIP रोक देता है और बाजार संभलने के बाद दोबारा शुरू करता है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, SIP जारी रखने वाले निवेशक ने गिरावट के दौरान ज्यादा यूनिट्स खरीदीं। बाजार में रिकवरी आने के बाद उसका पोर्टफोलियो करीब 2.51 लाख रुपये तक पहुंच गया और XIRR लगभग 49% रहा।
वहीं SIP रोकने वाले निवेशक का पोर्टफोलियो लगभग 1.46 लाख रुपये तक पहुंचा और उसका XIRR करीब 27% रहा। यानी गिरावट के दौरान निवेश जारी रखने वाले निवेशक को लंबी अवधि में ज्यादा फायदा मिला।
कम समय में XIRR कमजोर क्यों दिख सकता है?
बाजार में गिरावट के दौरान SIP पोर्टफोलियो का XIRR अक्सर कमजोर या नेगेटिव दिखाई दे सकता है। इसकी वजह यह होती है कि हाल में किए गए निवेश अस्थायी रूप से नुकसान में होते हैं।
एक्सपर्ट इसे 'J-Curve Effect' कहते हैं। पहले रिटर्न नीचे जाते हैं, लेकिन जब बाजार में सुधार आता है तो कम कीमत पर खरीदी गई यूनिट्स तेजी से रिटर्न बढ़ाने लगती हैं। इसलिए गिरावट के दौरान कमजोर XIRR को निवेश रणनीति की नाकामी नहीं माना जाना चाहिए।
किसे सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन निवेशकों का निवेश नजरिया 15 से 20 साल का है, उन्हें बाजार में गिरावट का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट, बच्चों की उच्च शिक्षा या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे लक्ष्यों के लिए निवेश करने वालों को ऐसे दौर में SIP जारी रखनी चाहिए।
वहीं जिन लोगों को अगले 1-2 साल में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें बाजार में गिरावट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता क्योंकि रिकवरी के लिए पर्याप्त समय नहीं होता।
निवेशकों की सबसे बड़ी गलती क्या है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार गिरते ही SIP रोक देना या निवेश निकाल लेना सबसे बड़ी गलती होती है। इससे निवेशक उन यूनिट्स को खरीदने का मौका गंवा देते हैं जो भविष्य में सबसे ज्यादा रिटर्न दे सकती हैं।
अगर निवेशक की आय और निवेश अवधि इसकी अनुमति देती है, तो गिरावट के दौरान SIP जारी रखने के साथ-साथ टॉप-अप SIP या निवेश राशि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। यही रणनीति लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न और मजबूत XIRR दिलाने में मदद कर सकती है।
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