₹10,000 या ₹1 लाख? जानिए ₹5 करोड़ का फंड बनाने में कितना समय बचा सकती है आपकी SIP
How to Build 5 Crore Corpus SIP: जब आपका कुल जमा फंड छोटा होता है, तो उस पर मिलने वाला 12% का रिटर्न भी बहुत छोटा होता है। इस फेज में आपकी संपत्ति केवल आपके जेब से डाले गए पैसों की वजह से बढ़ती है, बाजार का योगदान भी बहुत कम होता है
जानें क्या 10 गुना ज्यादा रकम निवेश करने पर समय भी 10 गुना कम लगता है?
SIP Compounding Power & Time Horizon: शेयर बाजार में पैसे लगाकर से हर कोई अमीर बनना चाहता है। बहुत से लोग ₹5 करोड़ जैसा बड़ा फंड बनाना चाहते है। लेकिन दो अलग-अलग निवेशक, जो हर साल 12% का समान रिटर्न पाते हैं और कभी अपनी SIP की रकम नहीं बढ़ाते, उनके लक्ष्य तक पहुंचने के समय में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है।
अगर आप हर महीने ₹1,00,000 की SIP करते हैं तो आप ₹5 करोड़ का टारगेट 15 साल में हासिल कर लेंगे, जबकि ₹10,000 की SIP करने वाले व्यक्ति को यही फंड बनाने में लगभग 33 साल लग जाएंगे।
लेकिन क्या 10 गुना ज्यादा रकम निवेश करने पर समय भी 10 गुना कम लगता है? जवाब है 'नहीं'। आइए आसान गणित से समझते हैं कि SIP में पैसे और समय का क्या संबंध है और कंपाउंडिंग का जादू कैसे काम करता है।
अलग-अलग SIP से ₹5 करोड़ बनने में कितना समय लगेगा?
अगर हम यह मानकर चलें कि आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो पर सालाना 12% का औसत रिटर्न (CAGR) मिलता है और आप SIP में कोई बढ़ोतरी (Step-up) नहीं करते, तो ₹5 करोड़ का फंड बनने में इतना समय लगेगा:
10 गुना ज्यादा निवेश, फिर भी समय सिर्फ आधा क्यों कम हुआ?
अगर आप ध्यान दें, तो ₹10,000 से ₹1,00,000 की SIP पर जाना यानी आपकी जेब से निकलने वाला निवेश 10 गुना बढ़ जाता है। लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने का समय 10 गुना कम होकर 3.3 साल नहीं होता, बल्कि आधा घटकर 33 साल से 15 साल पर ही आता है। इसके पीछे की वजह है कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का असमान तरीका।
शुरुआती साल: जब आपका कुल जमा फंड छोटा होता है, तो उस पर मिलने वाला 12% का रिटर्न भी बहुत छोटा होता है। इस चरण में आपकी संपत्ति केवल आपके जेब से डाले गए पैसों की वजह से बढ़ती है, बाजार का योगदान बहुत कम होता है।
बाद के साल: जैसे-जैसे समय बीतता है, आपके द्वारा कमाए गए रिटर्न पर भी रिटर्न मिलने लगता है। एक समय ऐसा आता है जब आपके हर महीने की SIP की तुलना में बाजार की कंपाउंडिंग की वजह से आपका फंड बहुत तेजी से भागने लगता है।
यानी ₹10,000 की SIP करने वाला निवेशक पूरी तरह से समय और कंपाउंडिंग पर निर्भर रहता है। वहीं, ₹1,00,000 की SIP करने वाला व्यक्ति वही काम अपनी जेब से ज्यादा पूंजी लगाकर तुरंत कर लेता है। यानी अगर आपके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, तो धैर्य ही आपकी पूंजी की भरपाई करता है।
निवेश का यह गणित लागू करने से पहले 3 जरूरी बातें
इस टाइमलाइन को अपनी योजना बनाने से पहले तीन अहम सावधानियों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है:
12% रिटर्न गारंटी नहीं है: इक्विटी म्यूचुअल फंड में रिटर्न कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं आता। कभी बाजार बहुत तेज भागेगा, तो कभी उसमें गिरावट आएगी। 12% एक औसतन अनुमान है।
स्टेप-अप SIP का जादू: ऊपर दिए गए उदाहरण में SIP की रकम को हर साल बढ़ाया नहीं गया है। अगर आप हर साल अपनी सैलरी बढ़ने के साथ अपनी SIP में 5% या 10% का इजाफा करते हैं, तो ये सभी टाइमलाइन बहुत तेजी से घट जाएंगी।
महंगाई का असर: आज से 33 साल बाद मिलने वाले ₹5 करोड़ की वैल्यू आज के ज़माने में 6% महंगाई दर के हिसाब से सिर्फ ₹73 लाख के बराबर होगी।
इस पूरे आंकड़े का निचोड़ बहुत सरल है: अगर आपके पास ज्यादा निवेश करने की क्षमता है, तो आप समय खरीद सकते हैं। और अगर आप ज्यादा रकम निवेश नहीं कर सकते, तो समय आपके लिए काम करेगा। शर्त बस इतनी है कि आपको जितनी जल्दी हो सके निवेश शुरू करना होगा और अपने पोर्टफोलियो को बिना छेड़े लंबे समय तक टिके रहना होगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।