SIP Strategy: उतार-चढ़ाव वाले बाजार में कैसे शुरू करें SIP? जानें किन म्यूचुअल फंड्स में दांव लगाना होगा समझदारी

SIP Investment Strategy: शेयर बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच नई SIP शुरू करने वाले निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है, क्या डाइवर्सिफाइड फ्लेक्सी-कैप के साथ सुरक्षित रहें या गिरते मिड और स्मॉल-कैप्स में धीरे-धीरे दांव लगाएं? एक्सपर्ट्स से जानिए 5, 7 और 10 साल के नजरिए के हिसाब से आपके लिए कौन सी कैटेगरी बेस्ट रहेगी और कैसे पोर्टफोलियो ओवरलैप से बचा जाए

अपडेटेड Oct 14, 2026 पर 3:51 PM
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SIP आपको बाजार के हर चढ़ाव और गिरावट में खरीदारी करने का मौका देती है, जिसे रुपया कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं

SIP Investment Strategy: शेयर बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच जब कोई निवेशक नया सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने की योजना बनाता है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि, क्या किसी डाइवर्सिफाइड फंड के साथ सुरक्षित शुरुआत करनी चाहिए या फिर करेक्शन का फायदा उठाकर Mid-Cap और Small-Cap फंड्स में धीरे-धीरे एक्सपोजर बढ़ाना चाहिए?

एकमुश्त निवेश के उलट, SIP आपको बाजार के हर चढ़ाव और गिरावट में खरीदारी करने का मौका देती है, जिसे रुपया कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि ज्यादा जोखिम वाली कैटेगरीज में तुरंत दांव लगा देना चाहिए? आइए जानते हैं बाजार विशेषज्ञों की राय।

हालिया प्रदर्शन: स्मॉल-कैप बनाम लार्ज-कैप


वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, हाल के समय में कैटेगरीज के रिटर्न में बड़ा अंतर देखने को मिला है:

Small-Cap Funds: पिछले एक साल में करीब 9.61 फीसदी का रिटर्न दिया है।

Large-Cap Funds: इसी अवधि के दौरान लगभग 5.74 फीसदी टूटे हैं।

वैसे जानकारों का कहना है कि सिर्फ पिछले 1 साल के रिटर्न को देखकर नई एसआईपी के लिए कैटेगरी चुनना गलत रणनीति साबित हो सकती है।

मिड और स्मॉल-कैप SIP: क्या अभी दांव लगाना सही है?

मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स को लेकर मार्केट एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है:

ट्रस्ट म्यूचूअल फंड के CEO संदीप बगला के मुताबिक, 'अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो मैं स्मॉल-कैप और मिड-कैप को प्राथमिकता दूंगा। इनकी ग्रोथ ट्रेजेक्टरी ज्यादा होती है। अगर मार्केट में करेक्शन आता भी है, तो एसआईपी के जरिए आप अपनी खरीद लागत को आसानी से एवरेज-आउट कर सकेंगे।'

गोदरेज वेल्थ के संदीप झा बताते हैं कि, 'बाजार में गिरावट से एंट्री वैल्युएशन बेहतर जरूर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी कैटेगरी अचानक आकर्षक हो गई है। मिड-कैप्स में तो फिर भी मौके दिखते हैं, लेकिन स्मॉल-कैप्स को लेकर सावधानी जरूरी है क्योंकि वहां वैल्युएशन अभी भी ऐतिहासिक स्तरों से ऊपर हैं और अर्निंग विजिबिलिटी व लिक्विडिटी को लेकर चिंताएं कायम हैं।'

Stocktick कैपिटल के फाउंडर विजय माहेश्वरी के मुताबिक, 'स्मॉल और मिड-कैप्स में एलोकेशन हमेशा सीमित और नपा-तुला होना चाहिए। केवल इसलिए पैसा न लगाएं क्योंकि हाल ही में कीमतें गिरी हैं।'

फ्लेक्सी-कैप, मल्टी-कैप या इंडेक्स फंड्स: डाइवर्सिफाइड कैटेगरीज का दम

नए एसआईपी निवेशकों के लिए डाइवर्सिफाइड फंड्स एक संतुलित रास्ता प्रदान करते हैं, जहां आपका पूरा पैसा किसी एक ही मार्केट सेगमेंट में ब्लॉक नहीं होता।

Wise Finserv के ग्रुप CEO अजय कुमार यादव कहते हैं कि, 'मैं Flexi-Cap Funds को सबसे ऊपर रखूंगा, जिसके बाद Large & Mid-Cap और Multi-Cap Funds का नंबर आता है। जब लार्ज-कैप में वैल्युएशन सस्ती होती है, तो फंड मैनेजर वहां एलोकेशन बढ़ा देता है और जैसे ही मिड या स्मॉल-कैप में वैल्यू मिलती है, वह शिफ्ट हो सकता है।'

विजय माहेश्वरी का सुझाव है कि निवेशक Large-cap Index Funds, Flexi-cap Funds और Balanced Advantage Funds (BAFs) को प्राथमिकता दें। BAFs मार्केट कंडीशंस के हिसाब से इक्विटी और डेट का रेशियो अपने आप एडजस्ट कर लेते हैं, जिससे वोलैटिलिटी का असर कम होता है।

टाइम होराइजन 5, 7 या 10 साल की SIP के लिए कौन-सी कैटेगरी?

आपका निवेश का समय यह तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि आपको पैसा कहां लगाना चाहिए:

निवेश का नजरिया  सुझाई गई फंड कैटेगरीज
5 साल  Multi-Asset Funds या Hybrid / Large-Cap Oriented Funds (रिस्क प्रोफाइल के अनुसार)।
7 साल Flexi-Cap Funds (एक मजबूत लार्ज-कैप कोर पोर्टफोलियो के साथ)।
10 साल या अधिक  Diversified Equity Funds (जिसमें आपकी क्षमता के अनुसार सीमित Mid-Cap/Small-Cap एक्सपोजर हो)।

एक SIP या कई फंड्स में बंटवारा?

अगर आप कम मासिक राशि (जैसे- ₹2,000 से ₹5,000) से शुरुआत कर रहे हैं, तो पैसे को 3-4 अलग-अलग स्कीमों में बांटने से कोई खास डाइवर्सिफिकेशन नहीं मिलता।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा फंड्स रखने से पोर्टफोलियो ओवरलैप हो जाती है यानी अलग-अलग स्कीमें भी घूम-फिरकर उन्हीं एक जैसे शेयरों में पैसा लगा रही होती हैं।

'शुरुआत हमेशा एक फ्लेक्सी-कैप फंड या ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स फंड जैसे- Nifty 50 / Nifty 500 से करें। दूसरी कैटेगरी तभी जोड़ें जब उसका आपके पोर्टफोलियो में कोई स्पष्ट और अलग मकसद हो।'

मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव से घबराकर एसआईपी रोकने या सिर्फ हालिया रिटर्न देखकर स्मॉल-कैप्स के पीछे भागने के बजाय अपने इन्वेस्टमेंट टाइम फ्रेम, मौजूदा पोर्टफोलियो और रिस्क क्षमता के आधार पर ही कैटेगरी का चुनाव करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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