Personal Loan: पर्सनल लोन लेकर फंस गए? घबराएं नहीं! बिना किसी टेंशन के जानें कैसे कैंसिल करें अपना लोन?

Personal Loan: आरबीआई का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' नियम ग्राहकों को पर्सनल लोन लेने के बाद उसे बिना किसी भारी जुर्माने के 3 से 14 दिनों के भीतर कैंसिल करने की सुविधा देता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच है जो जल्दबाजी में गलत लोन ले लेते हैं, जिससे वे प्रोसेसिंग फीस और मामूली ब्याज देकर कर्ज के जाल से बाहर निकल सकते हैं।

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 3:42 PM
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अक्सर हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जल्दबाजी में पर्सनल लोन तो ले लेते हैं, लेकिन पैसा खाते में आने के बाद एहसास होता है कि शायद यह फैसला गलत था। या तो ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा निकलती हैं या हमें कहीं और से पैसे का इंतजाम हो जाता है। ऐसी स्थिति में पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आरबीआई के नियमों के अनुसार, आपके पास इस गलती को सुधारने का एक मौका होता है? इसे कहते हैं ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ (Cooling-Off Period)।

क्या होता है कूलिंग-ऑफ पीरियड?

‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ एक तरह की 'विंडो' या समय सीमा है, जो बैंक या NBFC आपको लोन एग्रीमेंट साइन करने और पैसा मिलने के बाद देते हैं। यह अवधि आमतौर पर 3 दिन से लेकर 14 दिन तक हो सकती है। इस दौरान अगर आप अपना मन बदल लेते हैं, तो बिना किसी भारी नुकसान के लोन को कैंसिल कर सकते हैं।

कैसे काम करती है यह सुविधा?


अगर आपने डिजिटल ऐप या बैंक से लोन लिया है और आप उसे वापस करना चाहते हैं, तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा:

* तुरंत सूचना: आपको निर्धारित समय के भीतर बैंक या लोन देने वाली संस्था को लिखित में या ऐप के माध्यम से सूचित करना होगा।

* मूल धन की वापसी: आपको मिला हुआ पूरा पैसा वापस करना होगा।

* प्रोसेसिंग फीस का पेंच: ध्यान रहे कि इस दौरान लोन कैंसिल करने पर बैंक आपसे कोई 'कैंसिलेशन पेनल्टी' तो नहीं लेता, लेकिन आपकी प्रोसेसिंग फीस अक्सर वापस नहीं की जाती। कुछ मामलों में, जितने दिन पैसा आपके पास रहा, उतने दिन का मामूली ब्याज भी देना पड़ सकता है।

प्रीपेमेंट और कूलिंग-ऑफ में अंतर

कई लोग इसे 'फोरक्लोजर' या 'प्रीपेमेंट' समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं। अगर आप कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद लोन बंद करते हैं, तो उसे प्रीपेमेंट माना जाता है जिस पर बैंक भारी फोरक्लोजर चार्ज वसूलते हैं। वहीं, कूलिंग-ऑफ पीरियड के भीतर कदम उठाने पर आप इन अतिरिक्त खर्चों से बच जाते हैं।

क्रेडिट स्कोर पर असर?

सबसे राहत की बात यह है कि अगर आप इस समय सीमा के भीतर लोन कैंसिल कर देते हैं, तो इसका आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। चूंकि लोन पूरी तरह से एक्टिव या लॉन्ग-टर्म नहीं माना जाता, इसलिए आपकी क्रेडिट हिस्ट्री सुरक्षित रहती है।

जरूरी सावधानी: KFS चेक करें

RBI के निर्देशों के मुताबिक, अब हर बैंक को ग्राहक को एक Key Facts Statement (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन से जुड़े सभी छिपे हुए चार्ज और कूलिंग-ऑफ पीरियड की जानकारी साफ-साफ लिखी होती है। लोन के जाल में फंसने से बचने के लिए एग्रीमेंट साइन करने से पहले इसे पढ़ना सबसे जरूरी है।

डिजिटल दौर में कर्ज लेना जितना आसान है, उससे बाहर निकलना उतना ही पेचीदा हो सकता है। 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' ग्राहकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जो उन्हें वित्तीय सुरक्षा और दोबारा सोचने का मौका देता है।

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