Sukanya Samriddhi Yojana Calculator: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनकी बेटी की उच्च शिक्षा, करियर और शादी के वक्त पैसों की कोई तंगी न हो। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए शुरुआत से ही एक सही और सुरक्षित जगह बचत करना जरूरी है। अगर आप बिना किसी जोखिम के अपनी लाडली के लिए बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की 'सुकन्या समृद्धि योजना' (SSY) सबसे शानदार जरिया है।
इस सरकारी गारंटी वाली बचत योजना में आप हर महीने मात्र ₹12,500 बचाकर 21 साल बाद अपनी बेटी के लिए 70 लाख रुपये से अधिक का विशाल फंड तैयार कर सकते हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं इस योजना की पूरी ए-टू-जेड जानकारी और ब्याज का गणित।
हर महीने ₹12,500 जमा करने पर कैसे बनेंगे ₹70 लाख से ज्यादा?
सुकन्या समृद्धि योजना में मिलने वाली 8.20% की सालाना चक्रवृद्धि ब्याज दर ही आपके छोटे-छोटे निवेश को एक विशाल फंड में बदल देती है। अगर आप हर महीने ₹12,500 (यानी साल में कुल ₹1.5 लाख) का निवेश करते हैं, तो इसका पूरा कैलकुलेशन नीचे तालिका में देखें:
(नोट: खाता खुलने के बाद आपको केवल 15 साल तक ही पैसे जमा करने होते हैं। आखिरी के 6 सालों तक बिना नया पैसा डाले आपके पूरे फंड पर 8.20% की दर से चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ता रहता है, जिससे आपकी राशि तेजी से बढ़ती है।)
सुकन्या समृद्धि खाते से जुड़े जरूरी नियम और पात्रता
अगर आप अपनी बेटी का खाता खुलवाना चाहते हैं, तो इन मुख्य बातों का ध्यान रखें:
उम्र सीमा: बेटी के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र होने तक अभिभावक यह खाता खोल सकते हैं।
प्रति परिवार खाते: एक परिवार में अधिकतम 2 बेटियों के लिए यह खाता खोला जा सकता है। जुड़वां या एक साथ तीन बेटियां होने की स्थिति में दो से अधिक खाते की अनुमति है।
न्यूनतम व अधिकतम निवेश: खाते को एक्टिव रखने के लिए एक वित्त वर्ष में न्यूनतम ₹250 और अधिकतम ₹1,50,000 जमा करना अनिवार्य है।
आंशिक निकासी: जब बेटी 18 वर्ष की हो जाए या 10वीं कक्षा पास कर ले, तो उसकी उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए खाते में जमा कुल बैलेंस का 50% तक निकाला जा सकता है।
EEE कैटेगरी का ट्रिपल टैक्स बेनिफिट
स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में सुकन्या समृद्धि योजना को EEE श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है तीन स्तरों पर टैक्स बचत:
निवेश पर छूट: इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत हर साल ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है।
ब्याज पर टैक्स फ्री: हर साल जो ब्याज आपके खाते में जुड़ता है, उस पर कोई टैक्स नहीं लगता।
मैच्योरिटी पूरी तरह टैक्स फ्री: 21 साल पूरे होने पर मिलने वाली पूरी रकम (मूलधन + ब्याज) आयकर से पूरी तरह मुक्त होती है।