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सुप्रीम कोर्ट का फैसला-बैंक एंप्लॉयीज को मिलने वाला इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाला लोन टैक्स के दायरे में आएगा

बैंक अपने एंप्लॉयीज को इंटरेस्ट-फ्री लोन की सुविधा देते हैं। कुछ बैंक एंंपलॉयीज को दिए गए लोन पर कम इंटरेस्ट लेते हैं। इनकम टैक्स के नियम में ऐसे लोन को टैक्स के दायरे में माना गया है। कई बैंक यूनियन ने इस नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी

MoneyControl Newsअपडेटेड May 09, 2024 पर 1:11 PM
सुप्रीम कोर्ट का फैसला-बैंक एंप्लॉयीज को मिलने वाला इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाला लोन टैक्स के दायरे में आएगा
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बैंक अगर अपने एंप्लॉयीज को कम इंटरेस्ट रेट या जीरो इंटरेस्ट रेट पर लोन देता है तो यह बैंक में एंप्लॉयीज को मिलने वाला अतिरिक्त बेनेफिट है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक की तरफ से एंप्लॉयीज को दिए गए इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाले लोन पर टैक्स लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे लोन को फ्रिंज बेनेफिट माना है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों बैंक एंप्लॉयीज के लिए काफी अहम है। उन्हें इससे बड़ा झटका लगेगा। फ्रिंज बेनेफिट का मतलब ऐसे अतिरिक्त फायदों और सुविधाओं से है, जो कोई कंपनी एंप्लॉयीज को सैलरी के अलावा देती है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

कई एंप्लॉयर बेहतर काम के एवज में एंप्लॉयीज को खास सुविधाएं देते हैं। देश की सबसे बड़ी अदालत ने बैंक एंपलॉयीज को मिलने वाले टैक्स-फ्री या रियायती दर वाले लोन को इसी तरह की सुविधा माना है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बैंक अगर अपने एंप्लॉयीज को कम इंटरेस्ट रेट या जीरो इंटरेस्ट रेट पर लोन देता है तो यह बैंक में एंप्लॉयीज को मिलने वाला अतिरिक्त बेनेफिट है। इसलिए इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाले लोन का फायदा उठाने वाले एंप्लॉयी को इस पर टैक्स चुकाना होगा।

बैंकों के स्टाफ यूनियंस की तरफ से अपील की गई थी

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