अनमोल दास

अनमोल दास
क्या आप उन लोगों को अपनी संपत्ति में हिस्सेदार बनाना चाहते हैं, जिनसे आप प्यार करते हैं? क्या इसे आप अपने वसीयत में शामिल करना चाहते हैं? ऐसा करने से पहले आपको इससे जुड़े टैक्स के नियमों को समझ लेना जरूरी है, क्योंकि टैक्स के नियमों की अनदेखी होने पर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) का नोटिस मिल सकता है। अपने लोगों को गिफ्ट देने में कोई खराबी नहीं है, लेकिन कुछ गिफ्ट्स ऐसे हैं, जो टैक्स के दायरे में आते हैं। हम आपको करीबी लोगों को दिए जाने वाले उपहार से जुड़े टैक्स के नियमों के बारे में कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे हैं। इससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस के बगैर आप अपने लोगों को दिल खोलकर गिफ्ट्स दे सकेंगे।
शादी या उत्तराधिकार में मिले उपहार पर टैक्स के नियम
शादी या उत्तराधिकार में मिले गिफ्ट्स सबसे अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि इन दोनों तरीकों से मिले उपहार को लेकर टैक्स के नियम बहुत उदार हैं। शादी में दंपती को मिले उपहार पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है। शादी में आपको बतौर गिफ्ट कैश मिले या कोई सामान वे टैक्स के दायरे में नहीं आएंगे। लेकिन, अगर आप एक फाइनेंशियल ईयर में किसी दूसरे मौके पर किसी नॉन-रिलेटिव से 50,000 रुपये का गिफ्ट लेते हैं तो पूरे अमाउंट पर टैक्स देना होगा। दूसरा मामला उत्तराधिकार में मिली संपत्ति का है। अगर आपको वसीयत के जरिए पैसे या प्रॉपर्टी मिलती है तो उस पर आपको टैक्स नहीं चुकाना होगा।
प्रॉपर्टी के ट्रांसफर पर टैक्स के नियम
मान लीजिए आपके पास दो प्रॉपर्टी है। इसमें से एक प्रॉपर्टी आप अपनी पत्नी के नाम ट्रांसफर करना चाहते हैं। ऐसा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको प्रॉपर्टी का मालिक मानेगा। इसके चलते इस प्रॉपर्टी से किराए के रूप में होने वाली कमाई पर आपको टैक्स चुकाना होगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि वह प्रॉपर्टी आपकी बीवी के नाम में है। इसके अलावा अगर कोई अचल संपत्ति उपहार में दी जाती है तो इसे पाने वाले को इस पर टैक्स चुकाना होगा। ज्वेलरी और आर्ट पर भी यह नियम लागू होता है। शर्त यह है कि प्रॉपर्टी, आर्ट या ज्वेलरी की वैल्यू 50,000 रुपये से अधिक होने पर ही टैक्स लगेगा।
शेयरों के ट्रांसफर पर टैक्स के नियम
अगर आप शेयर, ईटीएफ, म्यूचुअल फंड्स या शेयरों का पोर्टफोलियो उपहार में देना चाहते हैं और उसका मार्केट प्राइस 50,000 रुपये से ज्यााद है तो इसे अन्य स्रोत से आपकी आय मानी जाएगी। इस पर आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। जब गिफ्ट में मिले शेयरों को व्यक्ति बेचना चाहेगा तो उससे होने वाला मुनाफा कैपिटल गेंस के तहत आएगा और उस पर टैक्स देना होगा। टैक्स कितना लगेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस है या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस है।
(लेखक तेजी मंदी के रिसर्च हेड हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं।)
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