19 लाख का पैकेज फिर भी टैक्स 'ZERO'! कॉर्पोरेट कर्मचारियों के हाथ लगा टैक्स बचाने का ये धांसू फॉर्मूला
19 Lakh CTC Tax Free: ₹19 लाख के सालाना पैकेज होने के बाद भी आपका टैक्स जीरो हो सकता है। वो भी पूरी तरह से लीगल तरीके से। इसके लिए आपको अपनी जेब से कोई नया या भारी-भरकम निवेश भी नहीं करना है, बल्कि सिर्फ अपने सैलरी कंपोनेंट्स में एक स्मार्ट बदलाव करना है
सैलरी रीस्ट्रक्चरिंग कई मदद से आप टैक्स का एक बड़ा अमाउंट बचा सकते हैं
Salary Restructuring: नौकरीपेशा लोगों के बीच इन दिनों टैक्स प्लानिंग को लेकर एक दिलचस्प बहस छिड़ गई है। अमूमन माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत केवल 12 लाख रुपये तक की सैलरी ही टैक्स फ्री हो पाती है, जबकि कुछ खास कैलकुलेशन और धारा 87A के रीबेट के चलते इसे 17.75 लाख रुपये तक खींचा जा सकता है। लेकिन जैसे ही आपकी कमाई इस जादुई आंकड़े को पार करती है, टैक्स का बोझ अचानक आपकी जेब ढीली करने लगता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ₹19 लाख के सालाना पैकेज (CTC) पर भी लीगली अपने टैक्स को पूरी तरह 'जीरो' किया जा सकता है? जी हां, इसके लिए आपको अपनी जेब से कोई नया या भारी-भरकम निवेश भी नहीं करना है, बल्कि सिर्फ अपने सैलरी कंपोनेंट्स में एक स्मार्ट बदलाव करना है।
एक जैसी सैलरी, लेकिन टैक्स में जमीन-आसमान का अंतर
इस पूरे गणित को समझने के लिए एक ही कंपनी में काम करने वाले दो ऐसे कर्मचारियों का उदाहरण देखते हैं, जिनकी सालाना CTC ₹19 लाख है। साल के आखिर में जब टैक्स चुकाने की बारी आती है, तो पहला कर्मचारी लगभग 1.5 लाख रुपये का भारी-भरकम टैक्स भरता है। वहीं दूसरा कर्मचारी अपनी सूझबूझ से ₹1 का भी टैक्स नहीं देता और उसका टैक्स बिल जीरो हो जाता है।
इस बड़े अंतर की एकमात्र वजह यह है कि दोनों का सैलरी स्ट्रक्चर अलग-अलग तरीके से डिजाइन किया गया है।
ट्रेडिशनल सैलरी स्ट्रक्चर क्यों पड़ रहा है भारी?
पहले कर्मचारी के मामले में उसकी सैलरी को पुराने और पारंपरिक तरीके से डिजाइन किया गया है।
बेसिक सैलरी: ₹7.60 लाख
हाउस रेंट अलाउंस (HRA): ₹3.80 लाख
स्पेशल अलाउंस: ₹6.65 लाख
PF कॉन्ट्रिब्यूशन: ₹95000
नुकसान कहां हुआ? चूंकि नई टैक्स व्यवस्था में HRA जैसी चीजों पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। इस पुराने ढर्रे की वजह से उस कर्मचारी की कुल टैक्सेबल इनकम ₹17.5 लाख से ऊपर पहुंच जाती है और उसे ₹1.5 लाख से अधिक का टैक्स भुगतना पड़ता है।
स्मार्ट सैलरी स्ट्रक्चर: स्पेशल अलाउंस की जगह लें टैक्स-फ्री रिम्बर्समेंट
अब बात करते हैं दूसरे समझदार कर्मचारी की। उसने अपनी कंपनी के एचआर (HR) से बात करके अपने सैलरी कंपोनेंट्स को मॉडर्न और टैक्स-फ्रेंडली तरीके से रिस्ट्रक्चर करवा लिया। उसने 'स्पेशल अलाउंस' के रूप में सीधा कैश जो कि पूरी तरह टैक्सेबल होता है उसे लेने के बजाय, अपने पैकेज के एक बड़े हिस्से को 14% कॉर्पोरेट NPS और टैक्स-फ्री रिम्बर्समेंट भत्तों में बदलवा दिया।
उसका नया सैलरी ब्रेकअप कुछ ऐसा दिखा:
कॉर्पोरेट NPS (कंपनी का 14% योगदान): ₹106400 (यह नई टैक्स व्यवस्था में पूरी तरह टैक्स-फ्री है)।
बिजनेस कूपन / मील अलाउंस (Food Coupons): ₹96000
गैजेट एंड इक्विपमेंट अलाउंस: ₹45000
फ्यूल एंड व्हीकल मेंटेनेंस (कार खर्च): ₹150000
ऑफिशियल ड्राइवर सैलरी रिम्बर्समेंट: ₹180000
ब्रॉडबैंड और फोन अलाउंस: ₹30000
लर्निंग एंड डेवलपमेंट (स्किल अपग्रेड): ₹25000
टैक्स लायबिलिटी कैसे हुई 'ZERO'?
इन सभी टैक्स-फ्री भत्तों और कॉर्पोरेट NPS के योगदान को जोड़ने पर कुल नॉन-टैक्सेबल रकम करीब ₹6.32 लाख बन जाती है।
टैक्स का फाइनल गणित: इस स्मार्ट रीस्ट्रक्चरिंग की बदौलत दूसरे कर्मचारी की नेट टैक्सेबल इनकम ₹17.5 लाख से घटकर महज ₹11.18 लाख के आसपास रह गई। चूंकि यह आंकड़ा नई टैक्स रिजीम के टैक्स-फ्री स्लैब के भीतर आ जाता है, इसलिए उसकी कुल टैक्स लायबिलिटी घटकर शून्य हो जाती है।
टैक्स बचाने के लिए इन नियमों को जानना बेहद जरूरी
टैक्स बचाने का यह तरीका जितना आकर्षक और फायदेमंद दिखता है, आयकर विभाग के नियम इसके लिए उतने ही कड़े हैं। इस बेनिफिट का फायदा उठाने के लिए आपको इन बातों का खास ख्याल रखना होगा:
ITR फाइल करते समय खुद से दावा नहीं: इन बेनिफिट्स का क्लेम आप खुद से इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय नहीं जोड़ सकते।
ऑफर लेटर का हिस्सा होना जरूरी: इसके लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि ये सभी रिम्बर्समेंट और NPS योगदान आपकी कंपनी की तरफ से दिए जाने वाले सैलरी ऑफर लेटर और स्ट्रक्चर का आधिकारिक हिस्सा होने चाहिए।
असली बिल और सबूत जरूरी: नियमों के मुताबिक, इन भत्तों को क्लेम करने के लिए कर्मचारियों को संबंधित खर्चों के असली बिल, वाउचर और उनके ऑफिशियल इस्तेमाल के पुख्ता सबूत समय-समय पर अपनी कंपनी के पास जमा करने होंगे।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।