देश से बाहर cryptocurrencies खरीदने वालों की तरह ही अब भारतीय प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कॉइन्स में ट्रेडिंग या निवेश करने वाले भारतीय कर विभाग के रडार पर आ सकते हैं। सरकार आगामी बजट में क्रिप्टोकरंसी जैसे शब्दों को शामिल करने के साथ ही मौजूदा income tax और डिसक्लोजर नियमों में संशोधन पर विचार कर रही है। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा, सरकार cryptocurrency से हुई आय और उससे जुड़े निवेशों की जानकारी हासिल करना चाहती है।
बतानी होगी क्रिप्टो से हुई आय
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार Income Tax Act के सेक्शन 26ए और एनुअल इन्फोर्मेशन रेग्युलेशन (AIR) में संशोधन पर विचार कर रही है। एआईआर एक टैक्सपेयर के सभी निवेशों से जुड़ी जानकारी दिखाता है और अक्सर इसे 'टैक्स पासबुक' भी कहा जाता है।
एक सूत्र ने कहा, “Income Tax Act के कुछ हिस्सों में क्रिप्टोकरंसी, क्रिप्टो एसेट्स या डिजिटल करंसी जैसे शब्द जोड़ने की सिफारिश की गई है। इसका मतलब होगा कि टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों को विशेष रूप से cryptocurrency निवेश या ट्रेडिंग से हुई आय का खुलासा करना होगा।”
संशोधन के बाद क्रिप्टो की डिटेल मांग सकेंगे कर अधिकारी
AIR में जमा, म्युचुअल फंड्स, रिकरिंग डिपॉजिट और ज्वैलरी में किए गए 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा कि किसी निवेश का उल्लेख किया जाता है।
ऐसी आशंका है कि कर विभाग कानूनी रूप से बैंकों से सीधे cryptocurrency से जुड़े लेनदेनों की जानकारी नहीं मांग सकता है, क्योंकि इस एसेट का इनकम टैक्स एक्ट के तहत वर्णन नहीं किया गया है। एक बार यह संशोधन होने पर, कर अधिकारी बैंकिंग चैनल्स के माध्यम से हुए लेनदेनों का ब्योरा मांग सकते हैं। ज्यादातर मामलों में भारतीय क्रिप्टोकरंसी में निवेश और ट्रेडिंग से कमाए गए पैसे को जमा करने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। सरकार विदेशी संपदा से जुड़े डिसक्लोजर नियमों में संशोधन पर भी विचार कर रही है, जिससे भारतीयों को विदेश में खरीदी गई cryptocurrencies की घोषणा करनी होगी।