इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों पर लगेगा दोगुना TDS

अगर कोई शख्स रिटर्न फाइल नहीं करता है तो सेक्शन 206AB के तहत उसे डबल TDS देना होगा

अपडेटेड Jun 29, 2021 पर 2:49 PM

अभिषेक अनेजा

इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने किसी व्यक्ति के डिडक्ट किए जाने वाले या उसकी ओर से कलेक्ट किए जाने वाले टैक्स पर लागू दरों में कुछ बदलाव किए हैं। फाइनेंस एक्ट 2021 में सेक्शन 206AB और 206CCA जोड़े गए हैं।

किसे टैक्स डिडक्ट या कलेक्ट करना है?

इनकम टैक्स एक्ट के संबंधित सेक्शन में दी गई राशि की लिमिट से अधिक होने पर टैक्स डिडक्ट करना होता है। विभिन्न प्रकार के भुगतानों के लिए राशि की अलग लिमिट हैं।

आमतौर पर, बिजनेस में सप्लायर्स को मिलने वाले भुगतान पर टैक्स डिडक्ट करना होता है। हालांकि, कोई बिजनेस नहीं करने वाले व्यक्ति को भी प्रति माह 50,000 रुपये से अधिक के रेंट या 50 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी खरीदने की स्थिति में टैक्स डिडक्ट करना होता है।

विशेष गुड्स या सर्विसेज के सप्लायर को दी गई लिमिट से अधिक की बिक्री के बदले प्राप्त राशि पर टैक्स डिडक्ट करना होता है। उदाहरण के लिए, ज्वैलर को 5 लाख रुपये से अधिक की ज्वैलरी की बिक्री या 2 लाख रुपये से अधिक की बुलियन की बिक्री पर 1 प्रतिशत की दर से टैक्स कलेक्ट करना होता है।


सेक्शन  206AB और 206CCA क्या है?

सेक्शन 206AB किसी व्यक्ति का फर्म की ओर से टैक्स का डिडक्शन किए जाने और सेक्शन 206CCA किसी व्यक्ति या फर्म की ओर से टैक्स को कलेक्ट किए जाने पर लागू होगा।

इन सेक्शन में इनकम टैक्स रिटर्न नहीं दाखिल करने वालों के लिए लागू रेट्स से अधिक पर टैक्स डिडक्शन का प्रावधान है। न्यूनतम 5 प्रतिशत या संबंधित सेक्शन में दिए गए रेट्स का दोगुना में से जो भी अधिक हो वह रेट होगा।

अधिक रेट्स लागू होने की कैटेगरी में इन स्थितियों वाले व्यक्ति आ सकते हैं:

1 व्यक्ति ने पिछले दो फाइनेंशियल ईयर के लिए इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरी है और जिनके लिए रिटर्न भरने की निर्धारित तिथि समाप्त हो चुकी है।

2 सोर्स पर काटा गया या कलेक्ट किया गया कुल टैक्स दो फाइनेंशियल ईयर में से प्रत्येक में 50,000 रुपये से अधिक है।

PAN नहीं होने पर क्या होगा

अगर व्यक्ति PAN उपलब्ध नहीं कराता तो सेक्शन 206A के तहत TDS 20 प्रतिशत की दर से काटा जाता है। इसके अलावा लागू रेट्स पर इस सेक्शन के अतिरिक्त सेक्शन 206AB या 206CCA लागू होंगे।

सेक्शन 206AB और  206CCA के तहत छूट

दोनों सेक्शन ऐसे नॉन रेजिडेंट्स पर लागू नहीं हैं जिनके पास देश में एक स्थायी प्रतिष्ठान (PE) नहीं है।

इसके साथ ही यह इन मामलों में लागू नहीं होता जहां TDS इन पर काटा जाता हैः

1 सैलरी (सेक्शन 192)

2 एक एंप्लॉयी के बकाया बैलेंस का भुगतान (सेक्शन 192A)

3 लॉटरी या क्रॉसवर्ल्ड पजल से विनिंग (सेक्शन 194B)

4 हॉर्स रेस से विनिंग (सेक्शन 194BB)

5 सिक्योरिटाइजेशन ट्रस्ट में निवेश से इनकम (सेक्शन 194LBC)

6 कैश में विशेष राशि का भुगतान (सेक्शन 194N)

सेक्शन 206AB और 206CCA डिक्लेयरेशन

बहुत सी कंपनियों ने अब वेंडर्स से इनकम टैक्स रिटर्न के विवरण के साथ डिक्लेयरेशन मांगना शुरू कर दिया है जिससे इन दोनों सेक्शन से बचा जा सके और वे स्टैंडर्ड रेट्स पर टैक्स डिडक्ट या कलेक्ट कर सकें।

सेक्शन 206AB और 206CCA के लिए कम्प्लायंस की जांच

CBDT ने प्रोसेस को आसान बनाने के लिए इन दोनों सेक्शन के कम्प्लायंस की जांच की सुविधा दी है। वेंडर्स और सप्लायर्स पर इन सेक्शन के लागू होने का उनके PAN के इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है। इसके लिए भुगतान करने वाले को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिपोर्टिंग पोर्टल (https://report.insight.gov.in) पर एक लॉगिन बनाना होता है। लॉगिन के बाद टैक्स डिडक्ट या कलेक्ट करने वाले को ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in) अपने TAN के इस्तेमाल से रजिस्टर करना होता है।

CBDT की ओर से क्लैरिफिकेशन

CBDT ने एक सर्कुलर जारी कर यह आश्वस्त किया है कि टैक्स डिडक्ट या कलेक्ट करने वालों को फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में व्यक्ति के PAN की जांच करनी होगी और इसे दोबारा जांचने की जरूरत नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति टैक्स को डिडक्ट या कलेक्ट करने में नाकाम रहता है तो उसे डिफॉल्ट करने वाला असेसी माना जाएगा और सेक्शन 201 के तहत उसे इंटरेस्ट और जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है।

लेखक CA हैं।

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