सोना (Gold) दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में से एक है। इससे मिलने वाले रिटर्न को देखते हुए यह लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमतों में लगभग 20 हजार रुपये की वृद्धि हुई है। कोरोना वायरस के इस दौर में सोने में निवेश काफी तेजी से बढ़ा है।

भारत में सोना खरीदने के चार तरीके हैं। सोने को ज्‍वैलरी या सिक्के के तौर पर फिजिकल फॉर्म में किसी दुकान से खरीदा जा सकता है। हालांकि, गोल्ड ज्‍वैलरी खरीदने में क्‍लवालिटी, सुरक्षा और ज्‍यादा कॉस्‍ट की चिंता बनी रहती है। वहीं, दूसरा तरीका है गोल्ड म्यूचुअल फंड या ईटीएफ (Gold mutual funds or ETFs) की खरीदारी। इसमें सोने को पेपर फॉर्मेट में स्टॉक एक्‍सचेंज (Share market) में खरीदा और बेचा जा सकता है। इसके अलावा ई-पेमेंट प्लैटफॉर्म से आप डिजिटल गोल्ड (Digital gold) भी खरीद सकते हैं। इनके अलाव सरकार ने लोगों को अब फिजिकल सोना खरीदने के बदले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds) खरीदने का विकल्प दिया है। आपको बता दें कि आप जब सोना बेचते हैं तो उस पर Income tax देना पड़ता है, लेकिन Tax rate आपसे किस दर से वसूला जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सोना किस रूप में खरीदा है।

गोल्ड ज्वैलरी और सिक्कों पर लगने वालै टैक्स

सबसे अधिक लोग सोना गोल्ड ज्वैलरी और सिक्कों के रूप मे खरीदते हैं। इसे बेचने पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने लंबे समय तक गोल्ड ज्वैलरी को अपने पास रखा है। कुछ लोग लंबी अवधि और कुछ छोटी अवधि के लिए इसमें निवेश करते हैं। अगर सोना तीन साल से कम अवधि के लिए रखा जाए तो इस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (short term capital gains tax) लगेगा। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को इनकम में जोड़ा जाता है और टैक्स स्लैब के हिसाब से व्यक्ति को Income tax देना होता है। वहीं, तीन साल से अधिक यानी लंबी अवधि के लिए सोना अपने पास रखा जाए तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के आधार पर इसे बेचते वक्त टैक्स चुकाना होगा। इसमें 20% की दर से टैक्स चुकाना होता है। Gold mutual funds या ETFs सोना खरीदने का सबसे किफायती तरीका है। हालांकि, ETF की यूनिटें बेचने पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्‍स लगता है।

डिजिटल गोल्ड पर टैक्स

डिजिटल गोल्ड में निवेश करना सोने की खरीदारी का नया तरीका है। कई बैंकों से लेकर paytm, amazon, google pay जैसे ई-पेमेंट प्लैटफॉर्म, मोबाइल वॉलेट और ब्रोकरेज कंपनियों ने सेफगोल्ड (safe gold) के साथ समझौता करके अपने ऐप के माध्यम से डिजिटल सोना बेचना शुरू किया है। डिजिटल गोल्ड कि बिक्री पर भी फिजिकल गोल्ड और Gold mutual funds या ETFs की तरह की Income tax देना पड़ता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर लगने वाला टैक्स

लोगों को फिजिकल गोल्ड (गोल्ड ज्वैलरी और सिक्के) खरीदने के बदले गोल्ड बॉन्ड खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लोगों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने का विकल्प दिया है। Sovereign Gold Bonds सरकार के निर्देश पर RBI जारी करती है। इसकी मैच्योरिटी पीरियड 8 साल होती है। इस बॉन्ड के मैच्योर हो जाने के बाद होने वाले लाभ पर सरकार किसी तरह का Tax नहीं लेती है। इसके अलावा सरकार Sovereign Gold Bonds पर हर साल 2.5% की दर से interest भी देती है। लेकिन इस interest पर टैक्स लगता है। वहीं, अगर आप मैच्योरिटी पीरियड से पहले सोना गोल्ड बॉन्ड बेचते हैं तो उस पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही Income tax देना होता है।

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