फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में ही टैक्सपेयर्स को कुछ सेल्फ-डेक्लेरेश फॉर्म बैंक में जमा कर देने चाहिए। इनमें फॉर्म 15जी और फॉर्म 15एच शामिल हैं। टैक्सेबल इनकम टैक्स-छूट की सीमा से कम होने पर टैक्सपेयर बैंक को इंटरेस्ट पर टैक्स डिडक्ट नहीं करने की रिक्वेस्ट कर सकता है। इस साल से 75 साल और इससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजन जो इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करना चाहते हैं, वे अपने बैंक में फॉर्म 12बीबीए जमा कर सकते हैं।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट सिर्फ ऐसे सीनियर सिटीजन को मिली है, जिन्हें सिर्फ पेंशन और फिक्स्ड डिपॉजिट पर इंटरेस्ट से इनकम होती है। दूसरी शर्त यह है कि पेंशन और फिक्स्ड डिपॉजिट एक ही बैंक में होना चाहिए। फॉर्म 12बीबीए में कई चीजें भरनी होती हैं। इनमें सेक्शन 80सी से लेकर सेक्शन 80यू के तहत मिलने वाला डिडक्शन, सेक्शन 87ए के तहत टैक्स रिबेट और फिक्स्ड डिपॉजिट और एफडी से इंटरेस्ट से होने वाली कुल इनकम की डिटेल शामिल हैं।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज के मुताबिक, फॉर्म सब्मिट होने के बाद बैंक टैक्सपेयर की टोटल इनकम का कैलकुलेशन करता है। इसके लिए वह सेक्शन 87ए के तहत टैक्स डिडक्श और रिबेट पर विचार करता है और स्लैब रेट के मुताबिक फाइनल इनकम से टैक्स डिडक्ट कर लेता है। सीबीडीटी ने इसका ख्याल रखा है कि इस फॉर्म को भरने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उसने बैंकों को सीनियर सिटीजंस को फॉर्म भरने में मदद करने को कहा है।
एक तरह से सीनियर सिटीजन टैक्सपेयर्स की तरफ से बैंक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करेगा। सीबीडीटी का यह कदम बहुत अच्छा है। दरअसल, सीनियर सिटीजंस को आईटीआर फाइल करने में दिक्कत आती है, क्योंकि इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव होते रहते हैं।
फॉर्म 12बीबीए सब्मिट करने का एक और फायदा यह है कि इससे सीनियर सिटीजन को एफडी के इंटरेस्ट पर डिडक्ट किए गए टैक्स के रिफंड के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है। इनकम टैक्स के नियम के मुताबिक, अगर 60 साल और इससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजन को एक फाइनेंशियल ईयर में 50,000 रुपये से ज्यादा इंटरेस्ट इनकम होती है तो बैंक उस पर 10 फीसदी टीडीएस काट लेगा।
जो टैक्सपेयर्स 5 फईसदी और 10 फीसदी इनकम टैक्स के स्लैब में आते हैं, उनका काफी पैसा टीडीएस में निकल जाएगा। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को 7 लाख रुपये की इंटरेस्ट इनकम है तो 10 फीसदी टीडीएस के मुताबिक उसके 70,000 रुपये निकल जाएंगे। अगर टैक्सपेयर फॉर्म 12बीबीए सब्मिट कर देता है तो उसे 52,500 रुपये का टैक्स चुकाना होगा। फॉर्म 12बीबीए नहीं भरने वाले टैक्सपेयर को 17,500 रुपये का रिफंड मिलेगा।