TDS Deductions: ऐसा किया तो आप भी फंस सकते हैं इनकम टैक्स के जाल में! जानें TDS काटने को लेकर क्या है नियम और ऐसा नहीं करने पर क्या होगा?
TDS Rules For Individuals: इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार अब हाथ से बनाया गया TDS सर्टिफिकेट कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इसे हमेशा TRACES से ही जनरेट करें। वहीं जिसका TDS कटा है, वह अपने Form 26AS और AIS में इन डिटेल्स को वेरिफाई कर सकता है
अगर आप इसमें चूक करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आप पर भारी ब्याज और जुर्माना लगा सकता है
TDS Rules For Individuals: आमतौर पर माना जाता है कि TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स काटने की जिम्मेदारी सिर्फ कंपनियों या बिजनेस की होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर का किराया देते समय या प्रॉपर्टी खरीदते समय एक आम आदमी को भी TDS काटना पड़ सकता है? अगर आप इसमें चूक करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आप पर भारी ब्याज और जुर्माना लगा सकता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट साक्षी जैन और सुरेश सुराणा के इनपुट्स के आधार पर समझें TDS के ये जरूरी नियम।
कब एक इंडिविजुअल को काटना होता है TDS?
अगर आप बिजनेस नहीं करते, तब भी इन स्थितियों में आपकी जिम्मेदारी बनती है:
प्रॉपर्टी की खरीद (Section 194-IA): अगर आप 50 लाख रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति (घर या जमीन) खरीद रहे हैं, तो आपको पेमेंट करते समय 1% TDS काटना होगा।
भारी-भरकम किराया (Section 194-IB): अगर आप हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा का किराया देते हैं, तो साल में एक बार या घर खाली करते समय 2% TDS काटना जरूरी है।
प्रोफेशनल फीस या कॉन्ट्रैक्ट (Section 194M): अगर आप किसी रेजिडेंट को कॉन्ट्रैक्ट वर्क, प्रोफेशनल फीस या कमीशन के लिए साल में 50 लाख रुपये से ज्यादा देते हैं और आपका ऑडिट नहीं होता, तो 2% TDS काटना होगा।
NRI को पेमेंट (Section 195): अगर आप किसी गैर-निवासी को कोई भी टैक्सेबल पेमेंट जैसे- ब्याज, रॉयल्टी आदि करते हैं, तो आपको TDS काटना ही होगा। इसमें कोई मिनिमम लिमिट नहीं है।
अगर आपका बिजनेस 'टैक्स ऑडिट' के दायरे में है
अगर पिछले साल आपके बिजनेस का टर्नओवर 1 करोड़ रुपये या प्रोफेशनल फीस 50 लाख रुपये से ज्यादा थी, तो आप पर ये नियम लागू होंगे:
लोन पर ब्याज (Section 194A): 10,000 रुपये से ज्यादा के ब्याज पर 10% TDS।
कॉन्ट्रैक्टर को पेमेंट (Section 194C): सिंगल पेमेंट 30 हजार या सालाना 1 लाख से ज्यादा होने पर 1% से 2% TDS।
कमीशन (Section 194H): 20,000 रुपये से ज्यादा पर 2% TDS।
प्रोफेशनल फीस (Section 194J): 30,000 रुपये से ज्यादा पर 2% से 10% TDS।
TDS काटना भूले तो क्या होगा?
TDS न काटना या काटकर सरकारी खजाने में जमा न करना आपको महंगा पड़ सकता है:
TDS नहीं काटने पर: जिस तारीख को टैक्स काटना था, तब से लेकर काटने की तारीख तक 1% प्रति महीना का साधारण ब्याज।
काट लिया लेकिन जमा नहीं किया: टैक्स काटने की तारीख से लेकर पेमेंट की तारीख तक 1.5% प्रति महीना का ब्याज।
रिटर्न भरने में देरी: अगर आप TDS रिटर्न भरने में देरी करते हैं, तो धारा 234E के तहत 200 रुपये प्रतिदिन की लेट फीस देनी होगी।
TDS सर्टिफिकेट कैसे जारी करें?
टैक्स काटने और जमा करने के बाद आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। आपको सामने वाले व्यक्ति को TDS सर्टिफिकेट भी देना होगा:
निर्धारित चालान के जरिए टैक्स जमा करें।
इनकम टैक्स पोर्टल पर TDS रिटर्न फाइल करें।
पेमेंट सिस्टम में दिखने के बाद TRACES पोर्टल (tdscpc.gov.in) से सर्टिफिकेट डाउनलोड करें।
यहां आपको बता दें कि हाथ से बनाया गया TDS सर्टिफिकेट कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इसे हमेशा TRACES से ही जनरेट करें। वहीं जिसका TDS कटा है, वह अपने Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) में इन डिटेल्स को वेरिफाई कर सकता है।