GST छूट के बाद 150% बढ़ी टर्म इंश्योरेंस की बिक्री! जानिए ₹3 करोड़ के कवर पर क्यों दांव लगा रहे हैं लोग?

Term Insurance GST Exemption Impact: टर्म इंश्योरेंस पर जीएसटी खत्म होने के एक साल बाद भारतीय इंश्योरेंस मार्केट में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक टर्म इंश्योरेंस की मांग 1.5 गुना बढ़ गई है, जहां 50% से अधिक लोग ₹1 करोड़+ का कवर ले रहे हैं। वहीं, गृहिणियों में 60% की रिकॉर्ड बढ़त और HNIs में ₹3 करोड़ के कवर का क्रेज देखा जा रहा है। पढिए पूरी रिपोर्ट

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 5:25 PM
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जीएसटी छूट से जो पैसे बच रहे हैं, उसका इस्तेमाल ग्राहक अपना कवर बढ़ाने में कर रहे हैं

Term Insurance Report: केंद्र सरकार द्वारा टर्म लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी छूट दिए जाने के बाद देश में बीमा खरीदने वालों की सोच और रवैये में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ऑनलाइन इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी छूट लागू होने के पिछले एक साल में टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी में 150% की जोरदार तेजी दर्ज की गई है।

पॉलिसीबाजार की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी हटने से प्रीमियम सस्ता हुआ है, जिससे अब लोग न सिर्फ तेजी से टर्म प्लान ले रहे हैं बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से बड़ा कवर और राइडर्स भी चुन रहे हैं।

₹3 करोड़ से बड़े कवर की बढ़ी मांग


पॉलिसीबाजार के आंकड़ों के मुताबिक, जीएसटी छूट से जो पैसे बच रहे हैं, उसका इस्तेमाल ग्राहक अपना कवर बढ़ाने में कर रहे हैं। ₹3 करोड़ से अधिक का टर्म प्लान लेने वाले अमीर भारतीयों (HNIs) की हिस्सेदारी में 32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।एनआरआई सेगमेंट में ₹3 करोड़ से बड़े कवर की मांग में 35% का उछाल आया है।इसके अलावा, एनआरआई ग्राहकों में राइडर्स लेने का चलन 15% और HNIs में 9% बढ़ा है।

महिलाओं और गृहिणियों में बढ़ा फाइनेंशियल प्रोटेक्शन का ट्रेंड

रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू महिलाओं और होममेकर्स की वित्तीय जागरूकता है। महिलाओं द्वारा टर्म इंश्योरेंस खरीदने की रफ्तार पुरुषों की तुलना में 27% अधिक दर्ज की गई। साथ ही अब परिवार सिर्फ घर के कमाऊ सदस्य का ही नहीं, बल्कि घर संभालने वाली महिलाओं के आर्थिक योगदान और जिम्मेदारियों को समझते हुए उनके नाम पर भी टर्म इंश्योरेंस ले रहे हैं।

कारोबारियों की ये है पहली पसंद

नौकरीपेशा लोगों की तरह खुद का बिजनेस करने वाले या फ्रीलांसर्स के पास कंपनियों की तरफ से मिलने वाला ग्रुप इंश्योरेंस नहीं होता। जीएसटी छूट के बाद सेल्फ-एंप्लॉयड सेगमेंट द्वारा टर्म इंश्योरेंस खरीदने की रफ्तार अन्य ग्राहकों के मुकाबले 12% अधिक रही है। इससे साफ है कि अपनी और परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए व्यापारी वर्ग अब खुद से कस्टमाइज्ड कवर ले रहा है।

50% से ज्यादा लोग ले रहे ₹1 करोड़+ का बीमा

भारतीय बाजार में अब छोटा कवर लेने का दौर पीछे छूट रहा है:

₹1 करोड़+ कवर: कुल खरीदे गए टर्म इंश्योरेंस में से 50% से अधिक हिस्सेदारी ₹1 करोड़ या उससे ज्यादा के कवर की है।

₹2 करोड़+ कवर: 15% खरीदार ₹2 करोड़ से ऊपर का प्लान चुन रहे हैं।

राइडर्स की मांग (13% इजाफा): प्रीमियम कम होने से लोगों ने बेस प्लान के साथ Accidental Death Benefit (ADB) और Waiver of Premium (WOP) जैसे राइडर्स जोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि एक ही पॉलिसी में एक्सीडेंट और किसी बीमारी की स्थिति में पूरी सुरक्षा मिले।

18-25 साल के युवा सबसे आगे, आंध्र-तेलंगाना में सबसे ज्यादा क्रेज

18 से 25 साल की उम्र वाले युवाओं की हिस्सेदारी में 20% की सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई। युवा अब अपनी पहली नौकरी के साथ ही कम उम्र में सस्ता प्रीमियम लॉक कर रहे हैं। जीएसटी राहत के बाद टर्म इंश्योरेंस खरीदने में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना (+39%) सबसे आगे रहे। इसके बाद केरल (+11%) और महाराष्ट्र (+10%) का नंबर आता है।

एक्सपर्ट की क्या है राय

पॉलिसीबाजार के टर्म इंश्योरेंस प्रमुख वरुण अग्रवाल का कहना है कि, 'इंडिविजुअल टर्म लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी छूट का असर सिर्फ प्रीमियम सस्ता होने तक सीमित नहीं है। इससे उपभोक्ताओं की सोच में बुनियादी बदलाव आया है। ग्राहक बचत के पैसों का इस्तेमाल पर्याप्त बीमा और राइडर्स जोड़ने में कर रहे हैं। महिलाओं, गृहिणियों, सेल्फ-एम्प्लॉयड और कम उम्र के युवाओं में यह बदलाव दिखाता है कि टर्म इंश्योरेंस अब लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है।'

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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