अब पीक आवर्स में कैब से ट्रैवल करने के लिए आपको ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स को पीक आवर्स में दोगुना सरचार्ज वसूलने की मंजूरी दे दी है। इस पर ज्यादा डिटेल देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा ने बताया कि अब पीक आवर्स में कैब लेना महंगा पड़ेगा क्योंकि कैब एग्रीगेटर्स दोगुना सरचार्ज वसूल सकते हैं। इस पर ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। पहले यह सरचार्ज 1.5 गुना था। राज्य 3 महीने के अंदर अपने यहां ये नियम लागू कर सकते हैं।
अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से बेस फेयर भी नोटिफाई कर सकते हैं। ड्राइवर के कैंसिल करने पर किराए के 10 फीसदी तक पेनल्टी भी संभव है। यह पेनल्टी ड्राइवर और एग्रीगेटर दोनों पर लगेगी। राज्य निजी बाइक को कैब के तौर पर चलने की भी मंजूरी दे सकते हैं। राज्य इस पर बाइक एग्रीगेटर से फीस वसूल सकते हैं। कैब एग्रीगेटर को ड्राइवर का इंश्योरेंस भी करना होगा।
अब पीक आवर्स में कैब से ट्रैवल करने के लिए आपको ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स को पीक आवर्स में दोगुना सरचार्ज वसूलने की मंजूरी दे दी है। इस पर ज्यादा डिटेल देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा ने बताया कि अब पीक आवर्स में कैब लेना महंगा पड़ेगा क्योंकि कैब एग्रीगेटर्स दोगुना सरचार्ज वसूल सकते हैं। इस पर ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। पहले यह सरचार्ज 1.5 गुना था। राज्य 3 महीने के अंदर अपने यहां ये नियम लागू कर सकते हैं।
अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से बेस फेयर भी नोटिफाई कर सकते हैं। ड्राइवर के कैंसिल करने पर किराए के 10 फीसदी तक पेनल्टी भी संभव है। यह पेनल्टी ड्राइवर और एग्रीगेटर दोनों पर लगेगी। राज्य निजी बाइक को कैब के तौर पर चलने की भी मंजूरी दे सकते हैं। राज्य इस पर बाइक एग्रीगेटर से फीस वसूल सकते हैं। कैब एग्रीगेटर को ड्राइवर का इंश्योरेंस भी करना होगा। ड्राइवर को कम से कम 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने मोटर व्हीकल एग्रिगेटर गाइडलाइंस (MVAG) 2025 का नया सेट पेश किया है। ये दिशानिर्देश सबके लिए हैं। राज्य सरकारें इसे लेकर अपने नियम बना सकती हैं। परिवहन मंत्रालय ने राज्यों को ऐप बेस्ड कैब सेवाओं के लिए अपने नियम बनाने के लिए तीन महीने का समय दिया है।
हालांकि राइड कैंसिल करने के लिए जुर्माना लगाने के नियम को लेकर कई ड्राइवरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि कई बार बुकिंग कराने वाले लोग ओला और उबर जैसी दो कैब बुक करा लेते हैं। जब ड्राइवर लोकेशन पर पहुंचते हैं तो पैसेंजर वहां नहीं मिलते। ऐसे में कई बार राइड कैंसल करनी पड़ती है। इसके लिए जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए।