Union Budget 2003: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी। बजट बनाने की प्रक्रिया पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में शुरू हो गई थी। वित्त मंत्री के सामने अपने खर्च को नियत्रंण में रखते हुए हेल्थ, एजुकेशन, रेलवे, एंप्लॉयमेंट, इनवेस्टमेंट आदि के लिए आवंटन बढ़ाने का चैलेंज है। क्या आपने अपने बजट के बारे में सोचा है? दरअसल, बढ़ती महंगाई और सीमित आय को देखते हुए आपके लिए भी बजट बहुत मायने रखता है। अगर आपने अपने बजट के बारे में नहीं सोचा है तो आगे आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। यह नए साल का पहला महीना है। ऐसे में साल 2023 में अपनी आमदनी और खर्च का हिसाब-किताब लगाने का यह सही समय है। हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जो आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं।
1. देश की आर्थिक स्थिति का आप पर भी पड़ता है असर
आपको देश की आर्थिक स्थितियों का ध्यान रखने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि इसका असर आपकी आमदनी और खर्च पर भी पड़ता है। इसके लिए आपको इकोनॉमिस्ट बनने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ बुनियादी चीजौं की समझ रखने की जरूरत है। जैसे महंगाई की स्थिति, क्रूड ऑयल प्राइस, रोजगार की स्थिति आदि। इससे आपको अपने बजट को तैयार करने में काफी मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए तेजी से बढ़ती महंगाई के बीच आप अतिरिक्त खर्च करने के बारे में नहीं सोच सकते। इसी तरह जब रोजगार को मौके घट रहे हों तो आपको नौकरी बदलने के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
2. इनकम के अपने स्रोत को ठीक तरह से समझ लें
आपके लिए अपनी इनकम के बारे में ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है। इससे आपको अपना बजट बनाने में मदद मिलेगी। इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होने पर हमें अपनी इनकम का सही अंदाजा नहीं होता है। इससे कई बार हम अपनी कुल इनकम से ज्यादा खर्च देते हैं। इसके चलते हम वित्तीय दबाव में आ जाते हैं। इसलिए आप यह जान लें कि हर महीने कितने पैसे आपके पास आ रहे हैं और इसमें से आप कितना खर्च कर रहे हैं और कितना बचत कर रहे हैं।
यूनियन बजट 2023 आने में बाकी हैं सिर्फ कुछ हफ्ते, इसकी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
3. फिक्स्ड और वेरिएबल खर्च का फर्क जान लें
फिक्स्ड खर्च के तहत ऐसे एक्सपेंसेज आते हैं, जिन्हें हम हर महीने करते हैं। मकान का किराया, खाने-पीने का खर्च, ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिसिटी, स्कूल की फीस, यूटिलिटी पर आने वाला खर्च इसके उदाहरण हैं। वेरिएबल खर्च के तहत ऐसे खर्च आते हैं, जो घटते-बढ़ते रहते हैं। मेडिकल खर्च इसका उदाहरण है। किसी महीने आपका मेडिकल खर्च जीरो हो सकता है तो किसी महीने यह बहुत बढ़ सकता है। आपको अपने फिक्स्ड कॉस्ट को प्रायरिटी में रखना जरूरी है। इसके बाद अगर पैसे बचते हैं तो ही आपको बाहर खाना खाने, फिल्म देखने, छुट्टियां मनाने के बारे में सोचना चाहिए। इसलिए फिक्स्ड और वेरिएबल एक्सपेंसेज के बीच फर्क को समझना बहुत जरूरी है।
4. सेंविंग्स को बनाएं टॉप प्रायरिटी
फिक्स्ड खर्च जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी है सेविंग्स। सबसे पहले किसी इमर्जेंसी की स्थिति में यह आपकी मदद करती है। दूसरी, इससे आप अपने भविष्य के बड़े खर्च के लिए पैसे का इंतजाम करते हैं। आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपकी सेविंग्स पर मिलने वाला रिटर्न रिटले इनफ्लेशन रेट से हमेशा ज्यादा होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर आप पैसे तो जमा करेंगे, लेकिन उसकी रियल वैल्यू घटती जाएगी। अगर आप पांच साल बाद एक कार खरीदने के लिए सेविंग्स करना चाहते हैं तो आपका टारगेट अमाउंट कार की आज की कीमत जितना नहीं होना चाहिए। जिस कार की कीमत आज 5 लाख रुपये हैं, पांच साल बाद बढ़कर 6-7 लाख रुपये हो जाएगी। इसकी संभावित कीमत इनफ्लेशन रेट सहित दूसरी चीजों पर निर्भर करती है।
5. बजट में बदलाव के लिए रहें तैयार
यह याद रखें कि बजट आपने अपनी सुविधा के लिए बनाया है। बजट का मतलब यह नहीं कि जरूरत पड़ने पर खर्च के प्लान में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए अगर आप कार खरीदने के लिए सेविंग्स कर रहे हैं और इस बीच किसी अच्छी कंपनी का आईपीओ आ गया है तो उसमें निवेश किया जा सकता है। इसी तरह अचानक हेल्थ इमर्जेंसी आने पर भी आपको अपनी सेविंग्स के पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।