यूपी में घर खरीदार सावधान! UP RERA का बड़ा एक्शन, 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को नोटिस, 15 दिन में जवाब नहीं तो लग सकता है भारी जुर्माना

Home Buyers Alert : पीटीआई के मुताबिक यूपी रेरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी डिफॉल्टर प्रमोटर्स को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित विलंब शुल्क के साथ अपनी लंबित ऑडिट रिपोर्ट को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड कर दें। अगर प्रमोटर्स इस समय सीमा के भीतर ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है

अपडेटेड Jun 28, 2026 पर 5:34 PM
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी ने एक बड़ा कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश में घर खरीदारों के हितों की रक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी ने एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी रेरा ने राज्य के ऐसे 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की पहचान की है, जिनके प्रमोटर्स ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट ऑथोरिटी के वेब पोर्टल पर अब तक अपलोड नहीं की है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए यूपी रेरा ने इन सभी डिफॉल्टर प्रमोटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

15 दिन का मिला अल्टीमेटम, वरना लगेगा भारी जुर्माना

पीटीआई के मुताबिक यूपी रेरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी डिफॉल्टर प्रमोटर्स को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित विलंब शुल्क के साथ अपनी लंबित ऑडिट रिपोर्ट को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड कर दें। अगर प्रमोटर्स इस समय सीमा के भीतर ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।


क्या हैं यूपी रेरा के कड़े नियम और पेनाल्टी?

आधिकारिक बयान के मुताबिक हर वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद रियल एस्टेट प्रमोटर्स के लिए प्रोजेक्ट के खातों का ऑडिट कराना और वित्तीय वर्ष बंद होने के छह महीने के भीतर यूपी रेरा की वेबसाइट पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करना पूरी तरह अनिवार्य है। जो प्रमोटर्स तय समय पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रहते हैं, उन्हें संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए 25,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 4 और इससे जुड़े नियमों व विनियमों का उल्लंघन करने पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 5 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

स्वतंत्र ऑडिटर से जांच कराना जरूरी, पारदर्शिता पर जोर

यूपी रेरा के नियमों के मुताबिक, प्रोजेक्ट के खातों का ऑडिट प्रमोटर द्वारा नियुक्त किसी स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर से ही कराया जाना चाहिए। वह ऑडिटर प्रमोटर की कंपनी, समूह या किसी भी संबद्ध संस्था से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि स्वतंत्र जांच, वित्तीय रिपोर्टिंग की सटीकता और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। ऑथोरिटी ने वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने को एक गंभीर चूक बताया है। रेरा का कहना है कि यह रेरा अधिनियम के उन प्रावधानों के खिलाफ है जो प्रमोटर्स के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

घर खरीदारों को कैसे होगा इससे फायदा?

यूपी रेरा के अनुसार, यह ऑडिट रिपोर्ट केवल एक कागजी या प्रक्रियात्मक आवश्यकता नहीं है बल्कि यह आवंटियों के हितों की रक्षा करने का एक बेहद महत्वपूर्ण जरिया है। इस रिपोर्ट के जरिए ऑथोरिटी को प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। इसके जरिए घर खरीदारों और आम जनता को ऑथोरिटी की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट से जुड़ी सत्यापित और सटीक जानकारी उपलब्ध हो पाती है। इससे घर खरीदार खुद अपने प्रोजेक्ट की प्रगति और प्रमोटर द्वारा नियमों के पालन की निगरानी कर सकते हैं।

यूपी रेरा चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि रेरा के तहत समय पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा करना हर प्रमोटर की एक बुनियादी जिम्मेदारी है। स्वतंत्र ऑडिट और सटीक रिपोर्टिंग से पारदर्शिता बढ़ती है और घर खरीदारों का भरोसा मजबूत होता है। यूपी रेरा इन प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना जारी रखेगा ताकि आवंटियों के हितों की रक्षा की जा सके और राज्य का रियल एस्टेट सेक्टर अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद बन सके।

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