UPI के जरिए लेनदेन सितंबर में मासिक आधार पर 1.8 प्रतिशत घटकर 2,407 करोड़ रहा। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा संचालित UPI के जरिए अगस्त में 2,450 करोड़ लेनदेन हुए थे। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन की कुल वैल्यू भी 1.50 प्रतिशत घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रही, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये थी।
ये आंकड़े कारोबारियों के लिए अधिक राशि वाले यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से करीब दो सप्ताह पहले आए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लेनदेन में गिरावट का कारण अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना है। सितंबर में प्रतिदिन औसत लेनदेन 80.2 करोड़ रहा, जबकि अगस्त में यह 79.1 करोड़ था।
बाकी तरह के डिजिटल पेमेंट का हाल
RBI के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) के जरिए 35.40 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 7.05 लाख करोड़ रुपये रही। RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) प्रणाली के जरिए सितंबर में 3.25 करोड़ लेनदेन हुए। कुल वैल्यू 235.71 लाख करोड़ रुपये रही। वहीं, NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर) के जरिए सितंबर में 86.2 करोड़ लेनदेन हुए और इनकी कुल वैल्यू 46.75 लाख करोड़ रुपये रही।
15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR
सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट्स के लिए 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है। छोटे पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। दो व्यक्तियों के बीच (पर्सन टू पर्सन) लेनदेन फ्री रहेगा, फिर चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाले लेन-देन भी निःशुल्क रहेंगे।
75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, MDR की मैक्सिमम लिमिट प्रति लेन-देन 300 रुपये तक ही रहेगी। रेलवे, टेलिकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का एकसमान MDR लागू होगा। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर व डीलर के जरिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।