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59 यात्रियों को बिना टिकट ले जाना, बस कंडक्टर को पड़ा भारी! हाथ से गई सरकरी नौकरी, कोर्ट ने कहा- सरकार को हुआ बड़ा नुकसान

59 यात्रियों को बिना टिकट बस में बैठाना एक कंडक्टर को इतना भारी पड़ गया कि उसकी पूरी जिंदगी बदल गई। पहले यूपी के बस कंडक्टर की सरकारी नौकरी चली गई। फिर 22 साल तक कोर्ट के चक्कर लगते रहे, लेकिन आखिर में राहत नहीं मिली..

Edited By: Sheetalअपडेटेड May 07, 2026 पर 1:49 PM
59 यात्रियों को बिना टिकट ले जाना, बस कंडक्टर को पड़ा भारी! हाथ से गई सरकरी नौकरी, कोर्ट ने कहा- सरकार को हुआ बड़ा नुकसान
59 यात्रियों को बिना टिकट बस में बैठाना एक कंडक्टर को इतना भारी पड़ गया कि उसकी पूरी जिंदगी बदल गई।

59 यात्रियों को बिना टिकट बस में बैठाना एक कंडक्टर को इतना भारी पड़ गया कि उसकी पूरी जिंदगी बदल गई। पहले यूपी के बस कंडक्टर की सरकारी नौकरी चली गई। फिर 22 साल तक कोर्ट के चक्कर लगते रहे, लेकिन आखिर में राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने कहा कि इससे सरकार को पैसे का बड़ा नुकसान हुआ है। ये मामला सरकारी कर्मचारियों के लिए दंग करने वाला रहा क्योंकि नौकरी में लापरवाही करना भारी पड़ा। हालांकि, कंडक्टर ने सफाई दी कि तबीयत खराब थी जिसके कारण टिकट बांट नहीं पाया। लेकिन Allahabad High Court ने साफ कह दिया कि बिना टिकट यात्रियों को सफर कराना सिर्फ गलती नहीं, बल्कि सरकार को नुकसान पहुंचाने जैसा है।

Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के एक बस कंडक्टर को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना टिकट यात्रियों को सफर कराना गंभीर लापरवाही और बेईमानी है, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी आधार पर कंडक्टर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही माना गया।

यह मामला 23 जून 2004 का है। उस समय कंडक्टर फैजाबाद से अकबरपुर जा रही UPSRTC बस में ड्यूटी कर रहा था। यात्रा शुरू होने के करीब 12 किलोमीटर बाद बस की अचानक चेकिंग की गई। चेकिंग में पाया गया कि बस में 59 यात्री बिना टिकट सफर कर रहे थे। हालांकि कंडक्टर ने पे-बिल भर दिए थे, लेकिन यात्रियों को टिकट जारी नहीं किए गए थे।

इसके बाद कंडक्टर को चार्जशीट दी गई और जांच शुरू हुई। 19 सितंबर 2004 को जांच रिपोर्ट पेश की गई। फिर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अकबरपुर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और बाद में कंडक्टर की सर्विस खत्म कर दी गई। कंडक्टर ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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