वैभव सूर्यवंशी 15 साल की उम्र में ही कर रहे धांसू कमाई पर माइनर की इनकम पर कैसे लगता है टैक्स, कौन देता है?

Vaibhav Suryavanshi Income Tax: वैभव सूर्यवंशी ने छोटी सी उम्र में ही करोड़ों की धांसू कमाई कर हर किसी को हैरान कर दिया है। वैसे आज के दौर में वैभव सूर्यवंशी की तरह ही खेल, सोशल मीडिया रील्स, कंटेंट क्रिएशन या एक्टिंग के जरिए बच्चों का मोटी कमाई करना बेहद आम हो चुका है। जानिए उन पर कैसे टैक्स लगता है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 4:24 PM
आम तौर पर लोग मानते हैं कि बच्चे की पूरी कमाई माता-पिता की इनकम में ही जोड़ी जाती है, लेकिन यह सच नहीं है

Vaibhav Suryavanshi Income Tax: महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में क्रिकेट की पिच पर धमाल मचा दिया। वैसे क्रिकेट के मैदान से इतर पैसे कमाने के मोर्चे पर भी उन्होंने सनसनी मचाई हुई है। छोटी सी उम्र में ही करोड़ों की धांसू कमाई कर हर किसी को हैरान कर दिया है। आज के दौर में वैभव सूर्यवंशी की तरह ही खेल, सोशल मीडिया रील्स, कंटेंट क्रिएशन या एक्टिंग के जरिए बच्चों का मोटी कमाई करना बेहद आम हो चुका है।

लेकिन यहां एक बड़ा और पेचीदा सवाल ये खड़ा होता है कि जब कोई माइनर यानी 18 साल से कम उम्र का बच्चा लाखों-करोड़ों रुपये कमाता है, तो उसकी इस इनकम पर टैक्स कौन देता है? क्या टैक्स खुद बच्चा चुकाता है या यह जिम्मेदारी माता-पिता की होती है? आइए समझते हैं माइनर की कमाई पर टैक्स के क्या है नियम।

दो कैटेगरी में बंटती है बच्चों की कमाई


इनकम टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी भी माइनर बच्चे की कमाई को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है:

अर्नड इनकम: यह वह कमाई है जो बच्चा अपनी खुद की मेहनत, टैलेंट, स्किल्स, या किसी खास हुनर के दम पर कमाता है। जैसे- क्रिकेट या किसी अन्य खेल के टूर्नामेंट से मिलने वाली प्राइज मनी, एक्टिंग, सिंगिंग, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन या किसी बिजनेस से होने वाला मुनाफा। वैबव सूर्यवंशी की क्रिकेट से होने वाली कमाई इसी कैटेगरी में आती है।

अनअर्नड इनकम: इसमें वह पैसा आता है जिसके लिए बच्चे को खुद एक्टिव होकर मेहनत नहीं करनी पड़ती। जैसे- दादा-दादी या रिश्तेदारों से मिले कैश गिफ्ट, बच्चे के नाम पर बैंक खाते में जमा पैसों पर मिलने वाला ब्याज या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड निवेश पर मिलने वाला रिटर्न।

किसे देना होता है टैक्स और क्या है क्लबिंग का नियम?

आम तौर पर लोग मानते हैं कि बच्चे की पूरी कमाई माता-पिता की इनकम में ही जोड़ी जाती है, लेकिन यह सच नहीं है। इसके नियम काफी अलग हैं:

अगर कमाई अनअर्नड यानी पैसिव है-

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 99(1A) के तहत, ब्याज या निवेश से होने वाली पैसिव इनकम को माता-पिता में से उसकी इनकम में जोड़ा जाता है, जिसकी सालाना कमाई अधिक होती है। इस मामले में माता-पिता को प्रति माइनर बच्चे ₹1500 तक की टैक्स छूट मिलती है।

तलाक की स्थिति में: अगर माता-पिता का तलाक हो चुका है, तो बच्चे की यह पैसिव इनकम उस पैरेंट की कमाई में जोड़ी जाएगी, जिसके पास बच्चे की कस्टडी है।

माता-पिता न होने पर: अगर दुर्भाग्यवश बच्चे के माता-पिता दोनों नहीं हैं, तो यह कमाई गार्जियन की इनकम में नहीं जुड़ती। ऐसे में बच्चे को एक स्वतंत्र टैक्सपेयर माना जाता है और उसके नाम पर अलग से आईटीआर (ITR) फाइल होता है।

अगर कमाई टैलेंट और स्किल्स से है-

अगर बच्चा अपनी प्रतिभा, खेल जैसे- वैभव सूर्यवंशी, स्पेशल नॉलेज या पर्सनल एक्सपर्टीज से कमा रहा है, तो इस कमाई को माता-पिता की इनकम में नहीं जोड़ा जा सकता। इस पैसे पर खुद माइनर बच्चे को ही टैक्स देना होता है।

क्या माइनर के लिए भी ITR फाइल करना जरूरी है?

हां, बिल्कुल! अगर किसी माइनर बच्चे की अपनी टैलेंट से होने वाली सालाना कमाई टैक्स छूट की बेसिक लिमिट से ज्यादा है, तो उसके लिए भी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

इस स्थिति में बच्चे के नाम पर पैन कार्ड बनवाना पड़ता है। चूंकि माइनर खुद कानूनी रूप से टैक्स की बारीकियों को नहीं समझ सकता, इसलिए माता-पिता या गार्जियन को सेक्शन 303 के तहत 'रिप्रेजेंटेटिव असेसी' यानी प्रतिनिधि बनकर बच्चे की तरफ से रिटर्न दाखिल करना होता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब बच्चा बड़ी रकम कमा रहा हो या उसकी कमाई के एक से अधिक साधन हों, तो माता-पिता को सभी रिकॉर्ड्स, कमाई के दस्तावेज और टैक्स का सही हिसाब-किताब बेहद सावधानी से रखना चाहिए ताकि बाद में कोई कानूनी नोटिस न आए।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।