VPF vs NPS: कहां मिलेगा तगड़ा रिटर्न और टैक्स छूट? जानें EPF के बाद निवेश के लिए कौन सा ऑप्शन है बेहतर

VPF vs NPS Comparison: अगर आपकी सैलरी से भी हर महीने PF कट रहा है और आप बचे हुए पैसे को कहीं सही जगह इन्वेस्ट करने का सोच रहे हैं, तो VPF और NPS से बेहतर कोई विकल्प नहीं है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि VPF में एक खास लिमिट के बाद ब्याज पर भारी टैक्स लगता है

अपडेटेड Aug 13, 2026 पर 1:25 PM
दोनों योजनाएं रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बनाई गई हैं, लेकिन दोनों का वर्किंग मॉडल, टैक्स नियम और रिटर्न का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है

VPF vs NPS Comparison: जब आपकी सैलरी से हर महीने अनिवार्य रूप से ईपीएफ कट रहा होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि रिटायरमेंट फंड को और बड़ा बनाने के लिए अतिरिक्त पैसा कहां निवेश किया जाए? इस मामले में दो सबसे बेहतरीन ऑप्शन वॉलींटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सामने आते हैं।

दोनों योजनाएं रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बनाई गई हैं, लेकिन दोनों का वर्किंग मॉडल, टैक्स नियम और रिटर्न का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। आइए VPF और NPS को विस्तार से समझते हैं ताकि आप सही फैसला ले सकें।

VPF: सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न की कंफर्ट


VPF असल में आपके मौजूदा EPF खाते का ही विस्तार है। इसमें आप अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 12% अनिवार्य कटौती के अलावा खुद से अतिरिक्त योगदान दर्ज करवा सकते हैं। VPF पर वही ब्याज दर मिलती है जो सरकार हर साल EPF के लिए तय करती है। यह शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रहता है। यह उन नौकरीपेशा लोगों के लिए जिन्हें बिना किसी रिस्क के स्थिर और गारंटीड ब्याज पसंद है।

NPS: मार्केट-लिंक्ड ग्रोथ और बड़ा फंड बनाने का मौका

PFRDA द्वारा संचालित NPS एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट प्रॉडक्ट है। इसके तहत आपकी जमा राशि शेयर बाजार, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की जाती है। इसमें रिटर्न की कोई निश्चित दर गारंटीड नहीं होती, लेकिन लंबी अवधि में इक्विटी एक्सपोजर के चलते यह VPF के मुकाबले काफी अधिक रिटर्न देने का दम रखता है। 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर आप 60% फंड एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से आपको जीवनभर हर महीने पेंशन मिलती है।

टैक्स छूट के नियम: जानिए किसमे मिलेगा ज्यादा फायदा

टैक्स के मोर्चे पर VPF और NPS के बीच बड़ा अंतर है, जो आपकी टैक्स रिजीम (Old vs New Tax Regime) पर निर्भर करता है:

पुरानी टैक्स व्यवस्था में VPF सेक्शन 80C की कुल ₹1.5 लाख की सीमा के तहत आता है। वहीं NPS 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अलग से अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। यानी पुरानी टैक्स रिजीम में NPS आपको ज्यादा टैक्स बचाने का मौका देता है।

नई टैक्स रिजीम में VPF और NPS दोनों पर स्वयं के निवेश पर सीधे धारा 80C/80CCD(1B) की छूट नहीं मिलती, लेकिन NPS में एम्प्लॉयर के योगदान पर धारा 80CCD(2) के तहत टैक्स राहत का लाभ मिलता है।

VPF के लिए ₹2.5 लाख का 'टैक्स कैच'

अगर आपकी सैलरी अधिक है और आप VPF में बड़ा अमाउंट डाल रहे हैं, तो आपको एक खास नियम का ध्यान रखना होगा। एक वित्त वर्ष में यदि कर्मचारी का कुल EPF + VPF योगदान ₹2.5 लाख से अधिक हो जाता है, तो ₹2.5 लाख से ऊपर जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री नहीं रहता। उस अतिरिक्त ब्याज पर कर्मचारी को अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है। यानी उच्च आय वर्ग के लोगों को VPF में पैसा झोंकने से पहले अपने कुल योगदान का कैलकुलेशन कर लेना चाहिए।

लिक्विडिटी और निकासी के नियम

दोनों ही योजनाएं इमरजेंसी फंड बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये विशुद्ध रूप से लंबी अवधि के रिटायरमेंट खातिर हैं:

VPF: इसमें ईपीएफओ के नियमों के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों (जैसे- बीमारी, घर खरीदना, शादी आदि) में आंशिक निकासी की अनुमति मिलती है।

NPS: इसमें टियर-1 खाते से रिटायरमेंट (60 वर्ष) से पहले निकासी पर कड़े नियम लागू होते हैं, हालांकि विशिष्ट जरूरतों के लिए 3 साल बाद सीमित आंशिक निकासी की छूट है।

VPF या NPS- आपकी सैलरी के लिए कौन सा है बेस्ट?

VPF या NPS- आपकी सैलरी के लिए कौन सा है बेस्ट?

आपके लिए क्या सही है?

अगर आपका ईपीएफ योगदान पहले ही ₹2.5 लाख की सालाना सीमा को छू रहा है या आप शेयर बाजार में एक्सपोजर लेकर बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो NPS ज्यादा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आप रिस्क बिल्कुल नहीं लेना चाहते और पूंजी की सुरक्षा प्राथमिकता है, तो VPF चुनें।

वैसे एक स्मार्ट रणनीति ये भी है कि आप दोनों का संतुलन बना सकते हैं। सुरक्षित निवेश के लिए VPF का उपयोग करें और लंबी अवधि के इक्विटी ग्रोथ के लिए NPS में निवेश करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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