RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद डेट फंड के निवेशकों को क्या करना चाहिए?

इंटरेस्ट रेट्स अपने पीक पर पहुंचता दिखाई देता है। रिटेल इनफ्लेशन में कमी के संकेत मिले हैं। इसलिए फिलहाल बॉन्ड यील्ड के 7.20-7.40 फीसदी के दायरे में रहने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स को इनवेस्टमेंट के अपने टाइमफ्रेम के हिसाब से मैच्योर होने वाले ड्यूरेशन फंड्स में निवेश करना चाहिए

अपडेटेड Feb 08, 2023 पर 5:39 PM
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एमपीसी ने कमोडिटी की ऊंची कीमतों सहित कुछ दूसरे रिस्क के बारे में बताया है, जिसके चलते इनफ्लेशन हाई बना हुआ है।

इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। इसके साथ ही बॉन्ड बाजार का मूड बदल रहा है। 8 फरवरी को RBI ने रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया। इसके बाद एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि इंटरेस्ट रेट साइकिल अपनी पीक पर पहुंच गई है। रेपो रेट 25 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा था। इसका मकसद इनफ्लेशन को काबू में करना है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने बताया है कि पिछले कुछ समय से रिटेल इनफ्लेशन में कमी आ रही है। हालांकि, एमपीसी ने कमोडिटी की ऊंची कीमतों सहित कुछ दूसरे रिस्क के बारे में बताया है, जिसके चलते इनफ्लेशन हाई बना हुआ है।

रिटेल इनफ्लेशन 5.3 फीसदी रहने का अनुमान

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, "मानसून सामान्य रहने के अनुमान के आधार अगले फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में सीपीआई इनफ्लेश 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में यह 5 फीसदी, दूसरी तिमाही में 5.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.6 फीसदी रहने का अनुमान है।"

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इकोनॉमी की सेहत बेहतर होने के संकेत

मिराए एसेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीआईओ (फिक्स्ड इनकम) महेंदर जाजू ने कहा, "छोटी अवधि में इनफ्लेशन में थोड़ी कमी आने का अनुमान है, लेकिन अगले फाइनेंशियल ईयर में इसके 5 फीसदी से ऊपर बने रहने की आशंका है। इसलिए इस मामले में सावधानी बनाए रखने की जरूरत बताई गई है। इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाना इकोनॉमी की सेहत बेहतर होने का संकेत देता है।"

7.20-7.40 फीसदी रह सकती है बॉन्ड यील्ड

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी आने के बाद 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 3-4 प्वाइंट्स बढ़ गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार को पहले से इंटरेस्ट रेट बढ़ने का अनुमान था। जाजू का मानना है कि फिलहाल बॉन्ड यील्ड के 7.20-7.40 फीसदी के दायरे में रहने की उम्मीद है। पॉलिसी रेट्स में एडजस्टमेंट के साथ शॉर्ट टर्म रेट्स के ऊपर जाने की उम्मीद है।

इनवेस्टमेंट के टाइमफ्रेम और स्कीम ड्यूरेश में तालमेल जरूरी

कई इनवेस्टर्स ने पिछले रिटर्न को देखते हुए वेरी-शॉर्ट-टर्म बॉन्ड फंड्स में निवेश बनाए रखा है। मीडियम टर्म ड्यूरेशन और लॉन्ग टर्म ड्यूरेशन के रिटर्न में पिछले कुछ समय में इम्प्रूवमेंट देखने को मिला है, लेकिन इसमें निवेशकों की दिलचस्पी नहीं बढ़ी है। सिनर्जी कैपिटल सर्विसेज के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, "फिलहाल इनवेस्टर्स को तीन साल तक की मैच्योरिटी वाले शॉर्ट टर्म ड्यूरेशन डेट फंड्स में निवेश बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यील्ड बहुत अट्रैक्टिव हैं।" ACE MF के मुताबिक, 31 दिसंबर 2022 को शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स की एवरेज यील्ड टू मैच्योरिटी 7.59 फीसदी है।

आदर्श रूप से इनवेस्टर्स को अपने इनवेस्टमेंट का टाइमफ्रेम स्कीम के ड्यूरेशन के हिसाब से रखना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर इनवेस्टर्स का टाइमफ्रेम करीब तीन साल है तो उन्हें ऐसे शॉर्ट टर्म ड्यूरेशन फंड्स में निवेश करना चाहिए जिनका ड्यूरेशन करीब दो से तीन साल है।

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