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400 लाख करोड़ वाला शेयर बाजार क्या और पैसा बनाने का मौका देगा?

जब शेयर बाजार की बात हो, तो मशहूर निवेशक वॉरेन बफे से बेहतर सलाह देने वाला कौन हो सकता है? मौजूदा वक्त में निवेशकों के मन में अहम सवाल यह है कि क्या 400 लाख करोड़ वाला यह शेयर बाजार नई ऊंचाइयों पर जाकर उन्हें और अमीर बनाएगा या यह समय बाजार में गिरावट का है। यहां पर एक भरोसेमंद इंडिकेटर है, जो हमें यह अंदाजा देता है कि बड़ी तस्वीर कैसी होगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 08, 2024 पर 11:18 PM
400 लाख करोड़ वाला शेयर बाजार क्या और पैसा बनाने का मौका देगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेल्थ जेनरेशन के मामले में भारत का मौजूदा बुल रन बेजोड़ है।

जब शेयर बाजार की बात हो, तो मशहूर निवेशक वॉरेन बफे से बेहतर सलाह देने वाला कौन हो सकता है? मौजूदा वक्त में निवेशकों के मन में अहम सवाल यह है कि क्या 400 लाख करोड़ वाला यह शेयर बाजार नई ऊंचाइयों पर जाकर उन्हें और अमीर बनाएगा या यह समय बाजार में गिरावट का है। यहां पर एक भरोसेमंद इंडिकेटर है, जो हमें यह अंदाजा देता है कि बड़ी तस्वीर कैसी होगी। इस बफे इंडिकेटर नाम से जाना जाता है, जो सभी लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटल और देश जीडीपी का अनुपात होता है।

बफे इंडिकेटर दिखा रहा बेहतर तस्वीर

भारत का मिड-कैप और जीडीपी रेशियो 8 अप्रैल को 1.33 या 133 पर्सेंट है। यह 10 साल के औसत 0.93 से ज्यादा है। यह ट्रेंड से थोड़ा सा अलग है, लेकिन इंडिकेटर भारत में सबसे ऊंचे लेवल पर नहीं पहुंचा है। मिडकैप और जीडीपी अनुपात 2007 में 1.464 के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था जो 2008 में गिरकर 1 से भी कम हो गया।

मार्केट कैपिटल टू जीडीपी रेशियो 2021 में फिर से 100 पर्सेंट के आंकड़े पर पहुंच गया, क्योंकि कोविड के दौरान निचले स्तर से रिकवरी के बाद बाजार नऊ ऊंचाई पर पहुंच गया। इस इंडिकेटर का निचला स्तर 2001 में 0.23 पर पहुंच गया था, जिससे 2003-2007 के दौरान बुल रन की बुनियाद तैयार हुई।

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