FD कब तुड़वानी चाहिए? RBI के रेपो रेट हाइक के बाद क्या हो आपकी रणनीति? एक्सपर्ट से समझिए
FD Withdrawal Rules: आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाकर 5.5% करने के बाद बैंक एफडी की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। ऐसे में क्या पुरानी एफडी बंद करके नए रेट पर पैसा लगाना फायदेमंद होगा? समझिए समय से पहले एफडी तुड़वाने के पेनल्टी नियम, पैसे निकालने का सही वक्त और 'एफडी लेडरिंग' की वह स्मार्ट ट्रिक, जिससे आपको मिलेगा बिना नुकसान के सबसे तगड़ा रिटर्न
ब्याज दरें बढ़ने की खबर सुनते ही क्या पुरानी एफडी तुड़वा लेना चाहिए? (IMAGE- AI)
FD Premature Withdrawal Rules: अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में अपना पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं या आपके पास पहले से कोई पुरानी एफडी मौजूद है, तो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में की गई 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी आपके लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। रेपो रेट अब बढ़कर 5.5% पर पहुंच गया है, जिससे बैंक आने वाले दिनों में फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं।
हालांकि, दरें बढ़ने की खबर सुनते ही बिना सोचे-समझे पुरानी एफडी तुड़वा लेना या पूरा पैसा तुरंत एक ही एफडी में लॉक कर देना नुकसानदेह हो सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि एफडी कब तुड़वानी चाहिए, पैसे कब निकालने चाहिए और मौजूदा समय में नए व पुराने निवेशकों को क्या कदम उठाना चाहिए।
एफडी कब तुड़वानी चाहिए?
पुरानी एफडी को समय से पहले बंद करने का फैसला तभी लेना चाहिए जब फायदा पेनल्टी से ज्यादा हो:
पुराने ब्याज और नए ब्याज का अंतर समझें: अगर आपकी पुरानी एफडी 6.5% ब्याज पर लॉक है और कोई बैंक अब उसी अवधि के लिए 7.5% या उससे अधिक ब्याज दे रहा है, तो एफडी तुड़वाना फायदेमंद हो सकता है।
पेनल्टी का हिसाब लगाएं: अमूमन बैंक समय से पहले एफडी बंद करने पर 0.5% से 1% तक की पेनल्टी काटते हैं। साथ ही, ब्याज उसी अवधि का मिलता है जितने समय तक पैसा जमा रहा। अगर पेनल्टी और घटे हुए ब्याज के बावजूद नया रेट आपको ज्यादा शुद्ध मुनाफा दे रहा है, तभी पुरानी एफडी तुड़वाएं।
एफडी लगभग मैच्योर होने वाली हो तो न तोड़ें: अगर आपकी एफडी की मैच्योरिटी में कुछ ही महीने बचे हैं, तो पेनल्टी कटवाने के बजाय मैच्योरिटी का इंतजार करना ज्यादा समझदारी है।
एफडी से पैसे कब निकालने चाहिए?
अपनी जमा पूंजी को एफडी से बाहर निकालने के लिए कुछ मुख्य परिस्थितियां सबसे उपयुक्त होती हैं:
इमरजेंसी या अचानक पैसों की जरूरत: अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या बड़ा वित्तीय संकट आ जाए, तो लिक्विडिटी के लिए एफडी से पैसा निकालना सही कदम है।(विकल्प के रूप में आप एफडी पर लोन भी ले सकते हैं।
बेहतर और सुरक्षित एसेट क्लास का मिलना: जब एफडी की तुलना में किसी अन्य सुरक्षित विकल्प (जैसे- पीपीएफ, एससीएसएस या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड) में टैक्स काटकर ज्यादा नेट-रिटर्न मिल रहा हो।
मैच्योरिटी पूरी होने पर: मैच्योरिटी के समय अगर बाजार में ब्याज दरें बढ़ रही हों, तो ऑटो-रिन्यूअल रोकने के लिए पैसे निकालकर नए उच्च दर वाले स्लैब में लगाना चाहिए।
रेपो रेट 5.5% होने के बाद अब नए एफडी निवेशकों को क्या करना चाहिए?
आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद भी बैंक तुरंत जमा दरों में बढ़ोतरी नहीं करते। बैंक अपनी लिक्विडिटी और कर्ज की मांग के हिसाब से धीरे-धीरे दरें बढ़ाते हैं। नया पैसा जमा करने से पहले स्मॉल फाइनेंस बैंकों, एनबीएफसी और सरकारी/निजी बैंकों के रेट्स की तुलना जरूर करें। वरिष्ठ नागरिक लग से स्पेशल एफडी रेट्स का लाभ उठा सकते हैं, जहां 0.50% तक अतिरिक्त ब्याज मिलता है।
बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, 'ब्याज दरें कब और कितनी बढ़ेंगी, यह हर बैंक का व्यक्तिगत फैसला होता है। निवेशकों के लिए सबसे बेहतर तरीका यह है कि वे अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड में पैसे को बांटकर जमा करें। इससे आपका कुछ पैसा हमेशा सुलभ रहेगा और जैसे-जैसे दरें बढ़ेंगी, मैच्योर होने वाला हिस्सा नए उच्च रेट पर रिन्यू होता रहेगा।'
यस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान का मानना है कि 'आरबीआई ने भविष्य में और सख्ती के संकेत दिए हैं। मौजूदा आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में फिर से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।' इसलिए लंबी अवधि जैसे- 5 या 10 साल की एफडी में एकमुश्त पैसा फंसाने के बजाय थोड़ा इंतजार करना समझदारी हो सकती है।
रेट हाइक का पुरानी एफडी पर क्या होगा असर?
अगर आपकी एफडी पहले से चल रही है, तो आरबीआई के इस फैसले से आपकी पुरानी एफडी की ब्याज दरों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। एफडी फिक्स्ड-रेट कॉन्ट्रैक्ट होती है, इसलिए आपको मैच्योरिटी तक वही तय ब्याज मिलता रहेगा जिस दर पर आपने एफडी बुक की थी।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।