UPI MDR Charges: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन (P2M) पर 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का ऐलान कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नई फीस से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा, ऐप्स को या फिर बैंकों को?
देश के UPI मार्केट पर Google Pay और PhonePe का एकछत्र राज है। करीब 90% UPI पेमेंट इन्हीं दो ऐप्स के माध्यम से की जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई व्यवस्था में असली बाजी बैंकों के हाथ लगी है। आइए आपको बताते हैं कि हर ट्रांजेक्शन पर कटने वाले इस पैसे का बंटवारा कैसे होगा और आम जनता व दुकानदारों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
किसे मिलेगा कितना हिस्सा?
NPCI द्वारा तय किए गए रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के अनुसार, कुल 0.40% MDR चार्ज का 70% हिस्सा अकेले बैंकिंग सेक्टर की जेब में जाएगा।
इश्यूइंग बैंक (40% हिस्सा): सबसे बड़ा फायदा उस बैंक को होगा जिसमें ग्राहक (पैसे भेजने वाले) का खाता है। कुल फीस का 40% सीधे इस बैंक को मिलेगा।
एक्वायर्ड बैंक (30% हिस्सा): दूसरा बड़ा हिस्सा दुकानदार का अकाउंट संभालने वाले बैंक को मिलेगा, जिसे 30% शेयर दिया जाएगा।
UPI ऐप्स (20% हिस्सा): फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे थर्ड-पार्र्टी ऐप्स को कुल फीस का केवल 20% हिस्सा ही मिलेगा।
स्पॉन्सर बैंक (10% हिस्सा): बाकी बचा 10% उन पार्टनर बैंकों के पास जाएगा जो इन UPI ऐप्स को बैकएंड सपोर्ट मुहैया कराते हैं।
₹10,000 के पेमेंट पर किसका कितना फायदा?
अगर आप किसी मर्चेंट को ₹10,000 का ऑनलाइन भुगतान करते हैं, तो 0.40% के हिसाब से कुल ₹40 का MDR कटेगा। इस ₹40 का बंटवारा इस प्रकार होगा:
आम जनता और मर्चेंट्स पर क्या होगा असर?
आम UPI यूजर्स पर इस फीस का कोई असर नहीं पड़ेगा। एनपीसीआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बैंक या मर्चेंट यह शुल्क ग्राहक से नहीं वसूल सकते। इसके अलावा ऐप्स पर किसी भी तरह का अलग 'प्लेटफॉर्म चार्ज' लगाने की मनाही है। नियमों के मुताबिक, यह शुल्क पूरी तरह से मर्चेंट्स को उठाना होगा।
पेट्रोल, ट्रेन टिकट, मोबाइल रिचार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी जरूरी सेवाओं के लिए केवल ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा। वहीं कैपिटल मार्केट यानी शेयर बाजार के लेन-देन पर यह दर मात्र 0.02% रखी गई है।
साल 2020 से शून्य-MDR मॉडल पर चल रहे UPI इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बजट में सरकार की तरफ से मिली सीमित सब्सिडी के बाद, इस फीस से होने वाली कमाई का इस्तेमाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सर्वर क्षमता बढ़ाने और साइबर फ्रॉड रोकने में किया जाएगा।