यूपीआई यानी यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस छोटे-बड़े पेमेंट के लिए लोगों की पहली पसंद बन गया है। अब तक यह फ्री है यानी इस्तेमाल पर किसी तरह की फीस नहीं लगती है। लेकिन, आगे यूपीआई के जरिए पेमेंट करने पर आपको फीस चुकानी होगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ही फीस लगेगी। लेकिन, प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में निवेश के लिए अब काफी ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल होने लगा है। तो क्या यूपीआई पर फीस का असर शेयर मार्केट में निवेश पर भी पड़ेगा?
ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय के लिए पड़ सकता है असर
NSE का मानना है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय समय के लिए पड़ेगा। लेकिन, उसके बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने कहा, "2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर एमडीआर चार्जेज का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर सिर्फ शुरुआत में पड़ेगा।" उनहोंने कहा कि कुछ समय बाद इसके सामान्य हो जाने की संभावना है।
एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलने जा रहा है
चौहान ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज के बारे में यह बात तब कही है, जब एनएसई का आईपीओ आ रहा है। यह इश्यू 17 सितंबर को खुल जाएगा। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा। एक्सचेंज के कुछ पुराने इनवेस्टर्स ओएफएस में अपने शेयर बेच रहे हैं। कुछ 12.64 करोड़ शेयर ओएफएस में बेचे जाएंगे।
आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी
चौहान ने कहा कि एनएसई के आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी दिख रही है। खासकर आईपीओ का साइज घटने के बाद ऐसा दिख रहा है। उनहोंने कहा, "एनएसई आईपीओ के लिए एंकर इनवेस्टर्स की डिमांड अनुमान से काफी ज्यादा है...क्योंकि इश्यू का साइज घट गया है।"
यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा
उन्होंने कहा, "लोकल म्यूचुअल फंड्स जैसे हर ग्रुप को खास ऐलॉटमेंट करने होंगे। एंकर बुक काफी बड़ा है। यह हमारी उम्मीद से ज्यादा है।" इस आईपीओ से एनएसई को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसकी वजह यह है कि एनएसई इस इश्यू में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। पहले एनएसई का प्लान 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का था। लेकिन, कई पुराने इनवेस्टर्स ने कम शेयर बेचने के फैसले लिए, जिससे इश्यू का आकार घट गया।