आजकल कई लोगों को अचानक बैंक से मैसेज या ईमेल मिलता है जिसमें लिखा होता है – “आपके लिए प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन तैयार है।” सुनने में यह ऑफर बेहद आकर्षक लगता है क्योंकि इसमें दस्तावेज प्रक्रिया कम होती है और पैसे तुरंत मिल जाते हैं। लेकिन क्या हर बार ऐसे लोन लेना सही होता है?
बैंकों के लिए प्री-अप्रूव्ड लोन एक स्मार्ट रणनीति है। वे अपने मौजूदा ग्राहकों के ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, क्रेडिट स्कोर और अकाउंट बैलेंस देखकर तय करते हैं कि किसे यह ऑफर दिया जाए। इससे उन्हें भरोसा रहता है कि ग्राहक समय पर लोन चुकाएगा। साथ ही, बैंक को नए ग्राहकों को ढूंढने की बजाय पुराने ग्राहकों से ही बिजनेस बढ़ाने का मौका मिलता है।
ग्राहकों के लिए भी यह ऑफर आसान होता है। बिना ज्यादा कागज़ी काम के तुरंत पैसे मिल जाते हैं। शादी, मेडिकल इमरजेंसी या किसी बड़े खर्च के लिए यह मददगार साबित हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार ऐसे लोन लेना समझदारी नहीं है।
पर्सनल लोन की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसकी ब्याज दरें अक्सर ज्यादा होती हैं। अगर आपने सिर्फ ऑफर देखकर लोन ले लिया और असल में उसकी ज़रूरत नहीं थी, तो यह आपके वित्तीय बोझ को बढ़ा सकता है। कई बार लोग शॉपिंग या छुट्टियों के लिए भी ऐसे लोन ले लेते हैं और बाद में EMI चुकाना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्री-अप्रूव्ड लोन तभी लें जब वास्तव में पैसों की ज़रूरत हो और आपके पास चुकाने की क्षमता हो। अगर सिर्फ ऑफर देखकर लोन लिया तो यह आपके क्रेडिट स्कोर और फाइनेंशियल हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल सकता है।