ज्यादा बंद हो रहीं SIP, फिर भी म्यूचुअल फंड में रिकॉर्ड निवेश! आखिर क्या है इसकी वजह?

मार्च और अप्रैल में SIP स्टॉपेज रेशियो 100% से ऊपर पहुंच गया, लेकिन निवेश रिकॉर्ड स्तर पर बना रहा। आखिर ज्यादा SIP बंद होने के बावजूद म्यूचुअल फंड में पैसा क्यों बढ़ रहा है और निवेशकों के व्यवहार में क्या बदलाव आया है?

अपडेटेड May 31, 2026 पर 10:25 PM
Story continues below Advertisement
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में पहली बार SIP स्टॉपेज रेशियो 100% के पार पहुंच गया।

म्यूचुअल फंड SIP को लेकर हाल में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक तरफ SIP बंद होने की रफ्तार नई SIP शुरू होने से ज्यादा हो गई है, वहीं दूसरी तरफ SIP के जरिए आने वाला निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ज्यादा लोग SIP बंद कर रहे हैं, तो निवेश का आंकड़ा लगातार बढ़ कैसे रहा है?

AMFI के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में पहली बार SIP स्टॉपेज रेशियो 100% के पार पहुंच गया। यानी जितनी नई SIP शुरू हुईं, उससे ज्यादा SIP बंद या पूरी हो गईं। अप्रैल में भी यही स्थिति बनी रही। इसके बावजूद मार्च में SIP के जरिए 32,087 करोड़ रुपये और अप्रैल में 31,115 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।

SIP बंद होने का मतलब हमेशा घबराहट नहीं


एक्सपर्ट्स का कहना है कि SIP स्टॉपेज रेशियो को सीधे निवेशकों के भरोसे में कमी के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस आंकड़े में वे SIP भी शामिल होती हैं जिनकी तय अवधि पूरी हो जाती है। इसके अलावा कई निवेशक एक फंड से दूसरे फंड में जाते हैं, अपने निवेश को व्यवस्थित करते हैं या निवेश का तरीका बदल लेते हैं। यानी SIP बंद होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि निवेशक बाजार छोड़कर चले गए हैं।

फिर रिकॉर्ड निवेश कौन कर रहा है?

इसका जवाब भारत के बदलते निवेशक वर्ग में छिपा है। अनुभवी निवेशक न सिर्फ निवेश जारी रखे हुए हैं, बल्कि कई मामलों में वे अपनी SIP राशि भी बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि कुछ निवेशकों के बाहर निकलने के बावजूद कुल निवेश का आंकड़ा मजबूत बना हुआ है।

अप्रैल 2026 तक SIP के जरिए निवेशित कुल संपत्ति (AUM) बढ़कर 16.85 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल संपत्ति का 20% से ज्यादा हिस्सा है। वहीं सक्रिय SIP खातों की संख्या 9.64 करोड़ रही।

नए निवेशकों का बदलता व्यवहार

ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म और खुद से निवेश करने के ट्रेंड ने निवेशकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव किया है। खासकर युवा निवेशक बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान जल्दी फैसले लेते हैं। तेजी के दौर में SIP शुरू करना और गिरावट आने पर उसे रोक देना अब आम होता जा रहा है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हाल के महीनों में बाजार में आई अस्थिरता ने नए निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ली है। कई निवेशकों ने SIP रोक दी, लेकिन लंबे समय से निवेश कर रहे लोग बाजार में बने रहे।

उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती

म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती नए निवेशक जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक निवेश में बनाए रखना है। जानकारों का मानना है कि SIP की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है बाजार की गिरावट के दौरान भी निवेश जारी रखना, समय-समय पर निवेश बढ़ाना और लंबी अवधि का नजरिया रखना।

ताजा आंकड़े यही संकेत देते हैं कि भले ही SIP स्टॉपेज रेशियो बढ़ा हो, लेकिन भारतीय निवेशकों का लंबी अवधि के निवेश पर भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।