इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से इंसानों की जरूरत कम नहीं होगी। उनका कहना है कि AI के दौर में कुशल और प्रशिक्षित लोगों की मांग और बढ़ेगी।
इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से इंसानों की जरूरत कम नहीं होगी। उनका कहना है कि AI के दौर में कुशल और प्रशिक्षित लोगों की मांग और बढ़ेगी।
FY26 की सालाना रिपोर्ट में शेयरधारकों को भेजे गए संदेश में नीलेकणी ने कहा कि टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री अपने सबसे बड़े बदलावों में से एक दौर से गुजर रही है। हालांकि उनका मानना है कि AI को बड़े पैमाने पर लागू करने में कंपनियों को अभी भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में IT सर्विस कंपनियों की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगी।
टेक्नोलॉजी से ज्यादा जरूरी है मूलभूत समझ
नंदन नीलेकणी का कहना है कि किसी भी टूल का इस्तेमाल करने से पहले उसके पीछे की बुनियादी समझ होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोगों को पहले मूल सिद्धांतों और अवधारणाओं को समझना चाहिए, उसके बाद तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। उनके मुताबिक AI के आने से मानव क्षमता की मांग घटेगी नहीं, बल्कि और बढ़ेगी।
AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा, लेकिन नई भी बनाएगा
नीलेकणी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2030 तक दुनिया भर में करीब 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि इसी अवधि में 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। यानी कुल मिलाकर करीब 7.8 करोड़ अतिरिक्त रोजगार बन सकते हैं। उनका कहना है कि AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, लेकिन इससे नए तरह के काम और नई स्किल्स की जरूरत भी पैदा होगी।
सिर्फ कोडिंग से नहीं चलता सॉफ्टवेयर
नीलेकणी ने कहा कि AI कोडिंग का काम तेज कर सकता है, लेकिन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सिर्फ कोड लिखने तक सीमित नहीं है।
किसी भी सॉफ्टवेयर को टेस्ट करना, उसकी जांच करना और ऐसे सिस्टम तैयार करना जो तेज, भरोसेमंद और बड़े स्तर पर काम कर सकें, यह काम अब भी इंसानों को ही करना होगा।
AI को लागू करने में अटक रही हैं कंपनियां
इंफोसिस चेयरमैन के मुताबिक आज कंपनियों के सामने AI के अवसरों की कमी नहीं है। असली समस्या उसे बड़े स्तर पर लागू करने की है।
कई कंपनियां पुराने तकनीकी ढांचे, जटिल प्रक्रियाओं और लगातार बदलते नियमों की वजह से AI को अपने सिस्टम में पूरी तरह शामिल नहीं कर पा रही हैं। नीलेकणी ने कहा कि ज्यादातर कंपनियां पायलट प्रोजेक्ट तक तो पहुंच जाती हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर AI लागू करने में अटक जाती हैं।
कर्मचारियों को AI के लिए तैयार कर रही है इंफोसिस
नीलेकणी ने बताया कि इंफोसिस अपने कर्मचारियों को AI के दौर के लिए तैयार कर रही है।
कंपनी ने FY26 में अपने 84% कर्मचारियों को AI से जुड़ी ट्रेनिंग दी है। इसके अलावा कंपनी ने 20,000 से ज्यादा नए कॉलेज ग्रेजुएट्स की भर्ती भी की है।
IT कंपनियों के लिए बड़ा मौका
नीलेकणी का मानना है कि AI की वजह से IT सर्विस कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। कंपनियां अब अपने पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए AI का इस्तेमाल करना चाहती हैं।
उनके मुताबिक दुनिया भर की कंपनियों के खरबों डॉलर के कारोबार ऐसे तकनीकी सिस्टम पर चल रहे हैं, जो पुराने दौर में बनाए गए थे। AI के दौर में इन्हें अपग्रेड करना जरूरी हो गया है।
भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर की बढ़ेगी अहमियत
नीलेकणी का कहना है कि भविष्य में वही कंपनियां सफल होंगी, जिनके पास ग्राहकों के साथ मजबूत रिश्ते, बेहतर एग्जीक्यूशन क्षमता और पुरानी व नई तकनीक को साथ लेकर चलने का अनुभव होगा।
FY26 के दौरान इंफोसिस का सालाना रेवेन्यू 20 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। वहीं कंपनी ने सालभर में 14.9 अरब डॉलर के बड़े डील हासिल किए, जो उसके कारोबार की मजबूती को दिखाते हैं।
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