5 साल से पहले PF निकाला तो लग सकता है टैक्स, जानिए EPFO के नियम
EPFO: नौकरी बदलने या बेरोजगार होने पर कई कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा निकाल लेते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि 5 साल की लगातार सर्विस पूरी होने से पहले PF निकालने पर टैक्स और TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स लग सकता है
EPFO: नौकरी बदलने या बेरोजगार होने पर कई कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा निकाल लेते हैं।
EPFO: नौकरी बदलने या बेरोजगार होने पर कई कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा निकाल लेते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि 5 साल की लगातार सर्विस पूरी होने से पहले PF निकालने पर टैक्स और TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स लग सकता है। ऐसे में PF निकालने से पहले इसके नियमों को समझना जरूरी है। इनकम टैक्स कानून और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, PF निकासी पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह से कर्मचारी के लगातार सर्विस पीरियड पर निर्भर करता है।
5 साल का नियम क्यों है महत्वपूर्ण?
इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 10(12) के तहत यदि कोई कर्मचारी कम से कम 5 साल की लगातार सर्विस पूरी करने के बाद PF का पैसा निकालता है, तो उसे पूरी तरह टैक्स छूट मिलती है। इस स्थिति में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का योगदान और उस पर मिला ब्याज—तीनों टैक्स फ्री रहते हैं। लगातार सर्विस का मतलब केवल एक ही कंपनी में काम करना नहीं है। यदि कर्मचारी नौकरी बदलता है और पुराने PF खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर कर देता है, तो पुरानी नौकरी के पीरियड भी इसमें जुड़ जाता है। यानी नौकरी बदलने के बावजूद PF ट्रांसफर करते रहने पर 5 साल की शर्त पूरी मानी जा सकती है।
कब टैक्स के दायरे में आ जाता है PF?
यदि कोई कर्मचारी 5 साल की लगातार सर्विस पूरी होने से पहले PF का पूरा पैसा निकाल लेता है, तो निकाली गई अमाउंट पर टैक्स लग सकता है। ऐसी स्थिति में निकाले गए अमाउंट को उस फाइनेंशियल ईयर की इनकम माना जाता है और उस पर इनकम टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स देना होता है। हालांकि, कुछ केस में 5 साल से पहले निकासी करने पर भी टैक्स छूट मिल सकती है।
कर्मचारी की गंभीर बीमारी।
कंपनी या संस्थान का बंद हो जाना।
किसी प्रोजेक्ट का पूरा हो जाना।
कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर अन्य कारण।
इन मामलों में समय से पहले PF निकासी को टैक्स योग्य नहीं माना जा सकता।
PF निकासी पर TDS के नियम
PF निकासी के समय केवल टैक्स ही नहीं, बल्कि TDS के नियम भी लागू होते हैं।
EPFO और इनकम टैक्स विभाग के अनुसार यदि सर्विस पीरियड 5 साल या उससे अधिक है, तो कोई TDS नहीं कटेगा। यदि सर्विस 5 साल से कम है और निकासी अमाउंट 50,000 रुपये से कम है, तो भी TDS नहीं कटेगा। यदि सर्विस 5 साल से कम है और निकासी अमाउंट 50,000 रुपये या उससे अधिक है, तो PAN उपलब्ध होने पर 10 प्रतिशत TDS काटा जाएगा। PAN नहीं देने पर अधिक दर से TDS कट सकता है। पात्र व्यक्ति Form 15G या Form 15H जमा करके TDS से राहत पा सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों। हालांकि यह समझना जरूरी है कि TDS अंतिम टैक्स नहीं होता। रिटर्न दाखिल करते समय इसका क्रेडिट लिया जा सकता है। यदि ज्यादा TDS कट गया है, तो टैक्स रिफंड भी मिल सकता है।
बेरोजगारी के दौरान PF निकासी
EPFO के नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी लगातार 2 महीने तक बेरोजगार रहता है, तो वह अपने PF खाते का पूरा पैसा निकाल सकता है। लेकिन पैसा निकालने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि निकासी टैक्स फ्री भी होगी। टैक्स का फैसला फिर भी 5 साल की सर्विस पीरियड के आधार पर ही किया जाएगा।
आंशिक निकासी पर क्या नियम हैं?
घर खरीदने, शादी, बच्चों की पढ़ाई या इलाज जैसी जरूरतों के लिए EPFO आंशिक निकासी की सुविधा भी देता है। ऐसी निकासी को सामान्य PF सेटलमेंट की तरह नहीं माना जाता और इन पर अलग नियम लागू होते हैं। आमतौर पर इन्हें पूर्ण निकासी की तरह टैक्स के दायरे में नहीं रखा जाता।
ITR में जानकारी देना जरूरी
यदि PF निकासी टैक्स योग्य है, तो उसकी जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देना जरूरी होता है। साथ ही EPFO द्वारा काटे गए TDS का दावा भी रिटर्न में किया जा सकता है। कर्मचारियों को अपने UAN के साथ आधार और PAN की जानकारी अपडेट रखनी चाहिए, ताकि निकासी प्रक्रिया में कोई परेशानी न आए।
क्या करना चाहिए कर्मचारियों को?
नौकरी बदलने पर PF निकालने के बजाय उसे नए नियोक्ता के खाते में ट्रांसफर करना सबसे बेहतर विकल्प है। इससे पुरानी सर्विस पीरियड भी जुड़ती रहती है और 5 साल की शर्त आसानी से पूरी हो जाती है। कुल मिलाकर यदि कर्मचारी 5 साल की लगातार सर्विस पूरी कर लेते हैं और PF खाते को ट्रांसफर करते रहते हैं, तो वे भविष्य में अपने पूरे PF कॉर्पस को बिना टैक्स और बिना TDS की चिंता के निकाल सकते हैं।