Women’s Day: फंड मैनजमेंट में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। 52 साल की अंजू झाजड़ (Anju Chhajer) को देखकर इस बात की तस्दीक हो जाती है। वह 83,000 करोड़ रुपये के एसेट का प्रबंधन करती हैं। Nippon India Mutual Fund की इस फंड मैनेजर पर छह फंडों के प्रबंधन की जिम्मेदारी है। वह बताती हैं कि शुरुआत में उनकी दिलचस्पी टैक्स कंसल्टेंट बनने में थी। अपने पिता से प्रभावित झाजड़ फाइनेंस के फील्ड में आ गईं। उनके पिता भी एक कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट में थे। अंजू झाजड़ का जन्म और पढ़ाई कोलकाता में हुई। उन्होंने 1997 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा किया।
पिता से मिली थी बचत और निवेश की सलाह
वह बताती हैं कि शुरू से ही उन्हें अपने पिता से बचत और निवेश करने की सलाह मिलती रही। उन्होंने कहा, "उनके पिता फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज और शेयरों में निवेश करते रहते थे। अब भी उनका शेयरों में काफी निवश है, जिस पर अच्छा रिटर्न मिलता है।" सीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक ऑडिट फर्म में काम करना शुरू किया। उसके बाद वह नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को ज्वाइन किया, जहां वह 10 साल तक रहीं। उसके बाद वह 2007 में Nippon India Mutual Fund से बतौर फंड मैनेजर जुड़ गईं।
नेशनल इंश्योरेंस में मिली डेट पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी
वह बताती हैं कि नेशनल इंश्योरेंस में उन्हें कंपनी के डेट पोर्टफोलियो के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी मिली। इससे डेट मार्केट की समझ विकसित हुई। उन्होंने कहा कि डेट मार्केट की अच्छी बात यह है कि यह बहुत साइंटिफिक है। पिछले कुछ सालों में डेट मार्केट बदलाव के कई चरणों से गुजरा है। इस दौरान यह फिजिकल डीलिंग से इलेक्ट्रॉनिक डीलिंग, डिलीवरी और सेटलमेंट तक पहुंच गया है।
कैपिटल मार्केट ने अनुशासित रहना सिखाया
कैपिटल मार्केट्स के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अनुशासित रहना सीखने को मिला। उन्होंने कहा, "मार्केट्स हमेशा बदलता रहता है। मैंने पिछले 16 साल में मार्केट्स के कई साइकिल देखे हैं। यह बदलाव फंड मैनेजर को खुद को बदलते रहने की अहमियत सिखाता है।" उन्होंने कहा कि मार्केट्स में गलतियां होती हैं। लेकिन, इससे हताश होने की जरूरत नहीं है। आपको फैसले लेने में डरना नहीं होगा।
हर सेक्टर में बढ़ रही महिलाओं की मौजूदगी
फंड मैनेजमेंट में महिलाओं की बढ़ती दिलचस्पी के बारे में उन्होंने कहा कि अब यह सिर्फ एक इंडस्ट्री की बात नहीं है। दूसरे सेक्टर में भी महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी देखी जा सकती है। इंटरेस्ट रेट्स में कमी की संभावनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा होना तय है। लेकिन यह कब होगा इस बारे में बताना मुश्किल है। अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इंटरेस्ट रेट में कमी की जा सकती है।
यह भी पढ़ें: पुरुषों की तुलना में महिलाएं हैं ज्यादा भरोसेमंद, Loan Repayment में ज्यादा जिम्मेदार