सीनियर सिटीजंस को रिटायरमेंट के बाद अलग तरह के चैलेंजेज का सामना करना पड़ता है। रेगुलर इनकम का स्रोत बंद हो जाता है। ऐसे में फाइनेंस के मामले में ठोस प्लानिंग जरूरी है। इसमें थोड़ी सी भी गलती भारी पड़ सकती है। सबसे पहले यह कैलकुलेशन जरूरी है कि आपके पास कुल कितना फंड है। नौकरी के दौरान व्यक्ति शेयरों, म्यूचुअल फंड्स, बैंक एफडी, इंश्योरेंस पॉलिसीज और रियल एस्टेट में निवेश करता है। यह निवेश रिटायरमेंट के बाद काम आता है।
