YOLO vs Savings: जो भी नौजवान पैसे कमाते हैं, उनके सामने एक बड़ी उलझन रहती है- वे पैसे अभी खर्च करें, या भविष्य के लिए बचत करें। इडलवाइज एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की CEO राधिका गुप्ता ने सोशल मीडिया पर इस दुविधा पर विस्तार से बात की है। उन्होंने अपनी हालिया पोस्ट में गुप्ता ने व्यक्तिगत अनुभव, व्यावहारिक उदाहरण और एक आसान सेविंग रूल के जरिए इस सवाल का संतुलित जवाब दिया है।
YOLO vs Savings: पुरानी बहस, नया अंदाज
गुप्ता ने अपने पोस्ट की शुरुआत एक सवाल से की- आज में खुलकर जीने और भविष्य के लिए बचत करने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? उनका कहना है कि आज के युवा निवेश को लेकर उलझन में रहते हैं। उन्होंने लिखा, 'मैं इतने सारे युवाओं से मिलती हूं, जो कहते हैं कि उन्हें नहीं पता निवेश कहां से शुरू करें। कितना करें... और आखिर शुरू कैसे करें?'
गुप्ता ने याद दिलाया कि यह खींचतान नई नहीं है। उन्होंने X पर लिखा, 'अगले कोल्डप्ले कॉन्सर्ट में जाने और पैसा बचाने के बीच का टकराव असली है। हर पीढ़ी ने इसे झेला है, इंस्टाग्राम से पहले भी। मेरी मां अब भी बताती हैं कि मेरे पिता ने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड्स खरीदने में खर्च कर दिया था।'
उनके मुताबिक, असलियत यह है कि जिंदगी YOLO (You Only Live Once) और बचत में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि बैलेंस बनाने की है।
10-30-50 रूल: हर उम्र के लिए अलग सेविंग पैमाना
राधिका गुप्ता ने अपनी किताब- Mango Millionaireसे एक प्रैक्टिकल फ्रेमवर्क साझा किया। इसे वह '10-30-50 रूल' कहती हैं। इस नियम में उम्र के अलग-अलग चरण में सेविंग का प्रतिशत तय किया गया है।
टैक्स और सेविंग्स: एक स्मार्ट तुलना
युवाओं की आम शिकायत होती है कि बचत करना मुश्किल है। राधिका गुप्ता ने ने इसका हल एक व्यावहारिक तुलना से दिया। उन्होंने कहा, 'युवा लोग अक्सर कहते हैं कि 10% बचाना कठिन लगता है। तब मैं उनसे पूछती हूं- टैक्स कैसे भरते हो? और जवाब मिलता है, 'अरे... टैक्स तो सोर्स पर ही कट जाता है।'
इसी से उन्होंने SDS (Savings Deducted at Source) का आइडिया पेश किया। यानी जैसे टैक्स पहले ही कट जाता है, वैसे ही सेविंग्स को भी ऑटोमेट कर दें। SIPs, RDs या FDs को ऐसे सेट करें कि पैसा आपके खाते में आने से पहले ही सेविंग्स में चला जाए।
अपनी पोस्ट के अंत में राधिक गुप्ता ने संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'आप जिंदगी का मजा ले सकते हैं और साथ ही वित्तीय भविष्य भी बना सकते हैं। आप दोनों कर सकते हैं- हैंडबैग भी खरीद सकते हैं और स्टार्टअप के लिए पैसा भी बचा सकते हैं। और यही असली फ्लेक्स है, Gen Z।'
मैंगो मिलियनेयर: आसान भाषा में पर्सनल फाइनेंस
राधिका गुप्ता और निरंजन अवस्थी की किताब मैंगो मिलियनेयर को पर्सनल फाइनेंस की सामान्य किताबों से अलग माना जाता है। यह जटिल निवेश रणनीतियों की बजाय बुनियादी और आसान तरीके से पैसे को मैनेज करने पर जोर देती है, ताकि युवा और नए निवेशक भी वित्तीय योजना को समझ सकें और अपनाएं।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।