क्या आपका खर्च इनकम से ज्यादा रहता है? क्या आप रेगुलर पर्याप्त सेविंग्स नहीं कर पा रहे हैं? क्या आप हमेशा पैसे की कमी महसूस करते हैं? अगर हां तो ये समस्याएं सिर्फ आपकी नहीं है। कई लोग ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं। अच्छी इनकम के बावजूद उन्हें पैसे की तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का समाधान है। आप जितनी जल्द इस समस्या को खत्म करने के फैसला लेंगे, आपके लिए उतना ही अच्छा होगा।
सबसे पहले आपको अपने खर्च (Expenditure) को समझना होगा। यह देखना होगा कि आपका पैसा कहां खर्च हो रहा है। आजकल कई ऐसे ऐप हैं, जिनकी मदद से आप अपने छोटे-बड़े खर्च का हिसाब रख सकते हैं। अगर आप टेक्नोलॉजी की मदद नहीं लेना चाहते तो अपने हर खर्च को एक नोटबुक में लिख सकते हैं। फिर महीने के अंत में उसका एनालिसिस कर सकते हैं। इससे आपको आपको ऐसे खर्चों के बारे में पता चलेगा, जो गैर-जरूरी थे। उन्हें आप नहीं करते तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। अगले महीने से आप ऐसे खर्चों पर अंकुश लगा सकते हैं।
अपने खर्च को अच्छी तरह से समझने के बाद आपको अपने वित्तीय लक्ष्य तय करने चाहिए। इसमें सबसे पहले आता है इमर्जेंसी फंड। अगर आपके पास इमर्जेंसी फंड नहीं है तो अभी से इस फंड को तैयार करना शुरू कर दे। आपका इमर्जेसी फंड कम से कम आपके तीने महीने के खर्च के लिए पर्याप्त होना चाहिए। आप हर महीने अपनी इनकम का कुछ हिस्सा इस फंड में डाल सकते हैं। इसके बाद आपको अपने बच्चों के हायर एजुकेशन, शादी आदि के लिए सेविंग्स करने की जरूरत है। फिर, आपको अपने रिटायरमेंट बाद के खर्चों के लिए कुछ सेविंग्स शुरू करना चाहिए।
तीसरा कदम आपके लिए बजट तैयार करना है। दरअसल आपने अपने खर्च का अंदाजा लगा लिया है, यह भी जान लिया है कि आपको हर महीने कितनी सेविंग्स करनी है। तो अब उसके लिए इनकम से पैसे का ऐलोकेशन करना होगा। इसके लिए बजट बनाना जरूरी है। आपको कोशिश करना है कि हर महीने आपका एक्सेपिंडर बजट के हिसाब से हो। अगर खर्च बजट से थोड़ा ज्यादा हो जाता है चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, यह बजट के मुकाबले बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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सेविंग्स और निवेश में फर्क को समझें
कई लोग सेविंग्स और निवेश के बीच के फर्क को नहीं समझते हैं। पहले तो सेविंग्स के नाम पर लोग सिर्फ बैंक एफडी और लाइफ इंश्योरेंस स्कीम में पैसे लगाते थे। लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट लोगों को लुभाने के लिए तरह-तरह की स्कीमों में निवेश करने की सलाह देते थे। लोग अपने व्यक्तिगत संबंधों पर भरोसा कर उनके बताए हिसाब से इंश्योरेंस स्कीम में पैसे लगाते थे। लेकिन, अब लोग समझदार हो रहे हैं। दूसरा, बाजार में ऐसी स्कीमें भी आ गई हैं, जिनमें निवेश करना आसान है और रिटर्न अच्छा है। ये स्कीमें पूरी तरह से पारदर्शी हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम इसका उदाहर है।