यूट्यूबर्स को बड़ा झटका! अब कमाई के लिए दोगुना करना होगा वॉच टाइम और व्यूज, जानिए पार्टनर प्रोग्राम के नए नियम

YouTube New Monetization Rules: यूट्यूब के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर क्रिएटर्स ने चिंता जताई है। छोटे क्रिएटर्स का मानना है कि इस फैसले से नए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब को कमाई का जरिया बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा

अपडेटेड Aug 12, 2026 पर 2:06 PM
1 फरवरी 2027 से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को सीधे दोगुना कर दिया गया है

YouTube Monetization New Rules: यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए एक बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आई है। यूट्यूब ने अपने यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) के जरिए विज्ञापनों और यूट्यूब प्रीमियम से होने वाली रेवेन्यू शेयरिंग के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। कंटेंट यानी वीडियो और शॉर्ट्स बनाकर कमाई करने का सपना देखने वाले नए क्रिएटर्स के लिए ये फैसला जोर का झटका देने वाला है।

1 फरवरी 2027 से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को सीधे दोगुना कर दिया गया है। आइए आपको बताते हैं कि इस बदलाव के तहत नए नियमों की हर एक-एक बारीकी क्या है और इसका छोटे व नए क्रिएटर्स पर क्या असर पड़ेगा।

नए क्रिएटर्स के लिए क्या बदल गए नियम?


यूट्यूब के नए नियमों के अनुसार, 1 फरवरी 2027 से अगर कोई नया क्रिएटर विज्ञापनों और यूट्यूब प्रीमियम से होने वाली कमाई के लिए अप्लाई करना चाहता है, तो उसे नीचे दी गई दो शर्तों में से एक को पूरा करना अनिवार्य होगा:

लॉन्ग-फॉर्म वीडियो: पिछले 365 दिनों में 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स। पहले यह सीमा 4,000 वॉच आवर्स थी।

यूट्यूब शॉर्ट्स: पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ क्वालिफाइड शॉर्ट्स व्यूज। पहले यह सीमा 10 मिलियन यानी 1 करोड़ व्यूज थी।

यूट्यूब ने स्पष्ट किया है कि यह 2018 के बाद से YPP में किया गया सबसे बड़ा बदलाव है। हालांकि, यह नियम सिर्फ नए क्रिएटर्स पर लागू होगा, जो क्रिएटर्स पहले से YPP का हिस्सा हैं, उन पर इस नई एंट्री थ्रेशोल्ड का कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर आप टारगेट पूरा नहीं कर पाते हैं तो क्या होगा?

जो क्रिएटर्स विज्ञापनों वाले इस बड़े टारगेट को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यूट्यूब ने कुछ रास्ते खुले रखे हैं:

फैन फंडिंग और शॉपिंग अनचेंज्ड: 'सुपर चैट', 'सुपर थैंक्स', 'चैनल मेंबरशिप' और 'यूट्यूब शॉपिंग' जैसे फीचर्स के लिए मोनेटाइजेशन की शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी। इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

मौजूदा शॉर्ट्स क्रिएटर्स के लिए नियम: जो क्रिएटर्स पहले से शॉर्ट्स से कमाई कर रहे हैं, उन्हें विज्ञापनों से रेवेन्यू शेयरिंग जारी रखने के लिए पिछले 90 दिनों में 10 मिलियन यानी 1 करोड़ व्यूज बनाए रखने होंगे।

चैनल YPP से बाहर नहीं होगा: अगर किसी क्रिएटर के व्यूज 10 मिलियन से कम हो जाते हैं, तो उसका चैनल YPP से हटाया नहीं जाएगा। जैसे ही वह फिर से 10 मिलियन व्यूज का आंकड़ा पार करेगा, उसकी शॉर्ट्स रेवेन्यू शेयरिंग अपने आप दोबारा शुरू हो जाएगी।

यूट्यूब ने क्यों लिया यह सख्त फैसला?

यूट्यूब ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में इस कड़े फैसले की वजह प्लेटफॉर्म के अभूतपूर्व विस्तार को बताया है। यूट्यूब पर अब रोजाना 200 अरब से अधिक शॉर्ट्स व्यूज आ रहे हैं और टीवी स्क्रीन्स पर हर दिन 1 अरब घंटे से ज्यादा का कंटेंट देखा जा रहा है। फिलहाल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में पहले से ही 30 लाख से अधिक सक्रिय क्रिएटर्स मौजूद हैं।

यूट्यूब का कहना है कि वे इस सिस्टम को ऐसा बनाना चाहते हैं जो सबसे सक्रिय और गुणवत्तापूर्ण क्रिएटर्स को बेहतर रिवॉर्ड दे सके। कंपनी को उम्मीद है कि वह 2026 की तुलना में 2027 में क्रिएटर्स को अधिक पेमेंट करेगी।

विज्ञापनों के अलावा कमाई के नए मौके

यूट्यूब चाहता है कि क्रिएटर्स सिर्फ विज्ञापन की कमाई पर निर्भर न रहें। इसलिए 10 मिलियन से कम शॉर्ट्स व्यूज वाले चैनलों के लिए यूट्यूब नए इंसेंटिव प्रोग्राम लाने जा रहा है:

शॉपिंग बोनस: यूट्यूब शॉपिंग के जरिए प्रोडक्ट्स बेचने पर अतिरिक्त बोनस।

ब्रांड डील्स और ट्रेंड्स इंसेंटिव: ब्रांड कोलैबोरेशन और नए ट्रेंड्स शुरू करने वाले क्रिएटर्स के लिए खास अर्निंग बूस्ट।

प्रीमियम लाइट: यूट्यूब अपने 'प्रीमियम लाइट' प्लान को सभी देशों में रोलआउट कर रहा है। प्रीमियम लाइट से मिलने वाले नेट सब्स्क्रिप्शन रेवेन्यू का 60% हिस्सा क्रिएटर्स के एक पूल में जाएगा। इस पूल में से लॉन्ग-फॉर्म वीडियो बनाने वालों को 55% और शॉर्ट्स बनाने वालों को 45% रेवेन्यू शेयर दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर क्रिएटर्स की चिंता

यूट्यूब के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर क्रिएटर्स ने चिंता जताई है। छोटे क्रिएटर्स का मानना है कि इस फैसले से नए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब को कमाई का जरिया बनाना काफी कठिन हो जाएगा और शुरुआती दौर में बिना किसी इनकम के 8,000 घंटे का वॉच टाइम हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

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